ब्रिटेन में हुए शोध में खुलासा, वैक्सीन के दो डोज दिखा रहे हैं अच्छा असर

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नई दिल्‍ली: कोरोना वेरिएंट बी.1.167.2 के खिलाफ एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के दो डोज अच्छा असर दिखा रहे हैं लेकिन एक डोज से कम असर नजर आया था।

कोरोना वायरस से बचाव को लेकर फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के असर पर ब्रिटेन में एक शोध का आकलन प्रकाशित किया गया है।

हालांकि इसकी अभी तक कोई समीक्षा नहीं हुई है। ये शोध खासतौर पर कोरोना वायरस के दो वेरिएंट- सार्स-सीओवी-2, जिसे ब्रिटेन से आए बी.1.1.7 के नाम से जाना जाता है और दूसरा भारत में पाए गए वेरिएंट बी.1.617.2 पर किया गया है। इसलिए भारत को जाहिर तौर पर इस शोध में दिलचस्पी है।

भारत में सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) एस्‍ट्राजेनेका का ही रूप बना रहा है, जिसका टीकाकरण बड़े स्‍तर पर चल रहा है। इससे पहले एस्ट्राजेनेका के क्लिनिकल ट्रायल से वैक्सीन के सुरक्षा और असर की जानकारी दी गई थी।

6 मार्च 2021 को प्रकाशित इस शोध परिणाम के मुताबिक बी.1.167.2 के खिलाफ इस वैक्सीन के दो डोज अच्छा असर दिखा रहे हैं लेकिन एक डोज से कम असर नजर आया था।

भारतीय दिशानिर्देश में कोविशील्ड टीकाकरण में दो डोज के बीच का अंतराल जो फरवरी तक 4-6 हफ्ते था, उसे मार्च में बढ़ाकर 6-8 हफ्ते और फिर मई में बढ़ाकर 12-16 हफ्ते कर दिया गया।

ये वैक्सीन की सुरक्षा और असर को लेकर लगातार चल रहे क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर तय किया गया।

इसके मुताबिक दो डोज (दूसरे डोज के 14 दिन के बाद) 66.7 फीसदी असरदार रही और वैक्सीन नहीं लगाए जाने वालों की तुलना में वैक्सीन का पहला डोज लेने वालों को 22 दिन के बाद भी अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं देखने को मिली।

वहीं पहले डोज के बाद 22 से 90 दिन में ये असर 76 फीसदी था और जब दो डोज के बीच 12 हफ्ते का अंतर रखा गया तो ये असर 80 फीसदी हो गया।

वैक्सीन की सुरक्षा के साथ इस ट्रायल का उद्देश्य दो डोज के बीच पर्याप्त अंतर के साथ उसका असर जानना भी था।

ट्रायल से पता चला कि 90 दिन तक वैक्सीन का एक डोज ही उतना असरदार होता है जितना दो डोज में होता है।

यहां गौर करने वाली बात ये है कि वैक्सीन के एक डोज का औसत असर 76 फीसदी तक था जो दो डोज के मुकाबले ज्यादा था। ये अजीब प्रतीत होता है।

आकलन बताते हैं कि दो डोज के बीच लंबा अंतराल वैक्सीन के असर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता है। इससे ये भी पता चलता है कि 6 हफ्तों के बजाए 12 हफ्तों का अंतर अच्छा ही असर दिखाता है।

कुल मिलाकर अध्ययन से साफ हो जाता है कि दो डोज़ के बीच अंतर बढ़ाने से वैक्सीन का असर बढ़ जाता है और एक डोज 90 दिनों तक वही असर दिखाती है जो इतने दिनों में दो डोज लगने पर नजर आती है।

नए शोध में बी.1.617.2 वैरिएंट से पीड़ित 1054 लोगों पर टेस्ट किया गया जिनमें से 244 को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन दी जा चुकी थी।

दो डोज वाली एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का असर, इस वैरिएंट पर 59.8 फीसदी है। वहीं बी.1.1.7 के खिलाफ इसका असर 66.1 फीसदी है।

इन आंकड़ों के क्लिनिकल ट्रायल में बताए गए असर से सीधे तुलना नहीं की जा सकती लेकिन अतिरिक्त जानकारी बताती है कि यह बी.1.1.7 वेरियंट से मिलता है जो बताता है कि वैक्सीन अलग अलग वैरिएंट पर असरदार है।

अकेले डोज का असर 32.9 फीसदी है। अच्छी बात यह है कि दो डोज का असर नए वैरिएंट पर अच्छा है।

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