रांची: झारखंड में एकबार फिर से सरना धर्म कोड को लेकर सियासत गरमाई है। विधानसभा के दूसरे दिन आदिवासी पहचान के मुद्दे पर खासा गरम रहा। सदन में सरना धर्म कोड, ओबीसी आरक्षण और परिसीमन जैसे सवालों को लेकर राजनीतिक पारा हाई रहा। जेएमएम विधायक हेमलाल मुर्मू ने केंद्र सरकार की नीतियों पर खुलकर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही सरना धर्म कोड को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर चुकी है, लेकिन अंतिम फैसला अब भी केंद्र के स्तर पर अटका हुआ है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय से अलग धार्मिक पहचान की मांग कर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर चुका है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
सदन में बोलते हुए उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधा। इस पर बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि हेमलाल ओजस्वी भाषण दे रहे हैं, पता नहीं किससे लिखवाकर आए हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अपने से तो पांच जन्म में नहीं लिख पाएंगे।

इस पर हेमलाल मुर्मू ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी से जो भी लड़ेगा, वह नहीं जीतेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग उनकी तरफ गए हैं, उन्हें भी वापस आना होगा। उनका आरोप था कि बीजेपी युवा विरोधी है।
जानिए सरना धर्म को लेकर अब तक क्या हुआ?
सर्ना धर्म कोड आदिवासी समुदाय की पारंपरिक आस्था और प्रकृति पूजा पर आधारित धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता देने की मांग है। फिलहाल जनगणना में आदिवासी समुदाय को “हिंदू”, “ईसाई” या “अन्य” श्रेणी में दर्ज किया जाता है, जिससे उनकी अलग सांस्कृतिक पहचान को उचित स्थान नहीं मिल पाता।
2019–2020 के दौरान झारखंड सरकार ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था। इसके बाद कई बार जनआंदोलन और राजनीतिक दबाव भी बना, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
हेमलाल मुर्मू ने साफ कहा कि सरना धर्म कोड सिर्फ धार्मिक पहचान का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आदिवासी अस्तित्व, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो राज्य में आंदोलन और तेज हो सकता है।





