पारा शिक्षकों ने कहा- हेमंत है तो हिम्मत है, फिर भी हम पर संकट है!

रांची: Para Teacher झारखंड के 65 हजार पारा शिक्षक स्थायीकरण और वेतनमान की मांग को लेकर पांच दिवसीय आंदोलन पर हैं।

आंदोलन के तीसरे दिन बुधवार को राज्य के कई जिलों के पारा शिक्षकों ने विधानसभा के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान रांची, पाकुड़ और हजारीबाग सहित अन्य जिलों के पारा शिक्षक पहुंचे थे।

तुगलकी फरमान से डरे बिना आज भी विधानसभा घेराव के तीसरे दिन एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राज्य इकाई के नेतृत्व में विधानसभा घेराव किया गया।

जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही चेतावनी देते हुए कहा की 21 मार्च तक हमारी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में मोर्चा बैठक कर उग्र आंदोलन की रणनीति तय करेगा।

विधानसभा के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर रहे पारा शिक्षकों ने कहा की चुनाव से पूर्व हमने सोचा सरकार बनते ही हमारी समस्याएं दूर हो जायेंगी, लेकिन ऐसा नही हुआ।

चुनाव से पूर्व हेमंत है तो हिम्मत है, सरकार में झारखंडी मुख्यमंत्री होगा तो हमारा भला होगा, स्थायीकरण और वेतनमान जैसी कई बातों को लेकर वादा किया गया, लेकिन अबतक सभी अधूरे हैं।

पारा शिक्षक अब अपना धैर्य खो रहे हैं और उग्र आंदोलन की ओर बढ़ रहे हैं।

यदि 19 मार्च तक पारा शिक्षकों की समस्याओं का निदान नहीं हुआ तो सत्तापक्ष के सभी विधायक/मंत्री का क्षेत्र में व्यापक विरोध किया जाएगा और इसकी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।

इधर बरकट्ठा विधायक अमित यादव ने पारा शिक्षकों के घेराव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “सरकार पारा शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है।

पारा शिक्षक खांटी झारखंडी हैं, अविलंब इनकी समस्याओं का निदान हो। मैं सड़क से सदन तक पारा शिक्षकों के लिए लड़ूंगा”।

इधर मौके पर एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के सदस्य संजय कुमार दुबे ने कहा कि स्थायीकरण और वेतनमान की मांग को लेकर पारा शिक्षक विगत कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

लेकिन, हर बार सरकार की ओर से आश्वासन ही मिलता है। इसी को लेकर पांच दिवसीय आंदोलन की शुरुआत 15 मार्च से की गई है।

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा बिनोद बिहारी महतो, संजय कुमार दुबे, हृषिकेश पाठक, प्रमोद कुमार, दशरथ ठाकुर, मोहन मंडल, दशरथ ठाकुर, प्रद्युम्न कुमार सिंह (सिंटू) ने घोषणा की है।

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