RANCHI : टेरर फंडिंग मामले में चैंकाने वाला खुलासा, किस-किस के पास जाता है पैसा, नाम सुन आप भी रह जाएंगे दंग, NIA कर रही जांच

News Aroma Media
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रांची: एनके पिपरवार एरिया से प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी के टेरर फंडिंग मामले की जांच एनआइए द्वारा की जा रही है, जिसमें चैंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

जी हां, कोयले की काली कमाई में न सिर्फ टीपीसी उग्रवादी संगठन, बल्कि ट्रांसपोर्टर से लेकर सीसीएल के कर्मी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।

बता दें कि राज्य में उग्रवादी संगठन पर एनआईए की दबिश के बावजूद वसूली का काम लगातार जारी है। उग्रवादी संगठन कोयला से करोड़ों की लेवी ले रहे हैं। वसूली का पैसा अब भी टीपीसी उग्रवादियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी पहुंच रहा है।

कैश लेन-देन पर रोक

वसूली पर लगाम लगाया जाए इसके लिए सीसीएल ने नगद लेनदेने पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब नए तरीके से वसूली की जा रही है। एक महीने में लगभग 6 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली अब भी जारी है। इस राशि का बंटवारा उग्रवादियों, प्रशासनिक अफसरों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बीच हो रहा है।

अब ऐसे चल रहा वसूली का खेल

पहले टीपीसी और दबंग कमेटी द्वारा वसूली की जाती थी, लेकिन अब दबंग कमेटी के अलावा ट्रांसपोर्ट यूनियन, कंपनियों और लिफ्टरों ने ले लिया है। मगध एनके पिपरवार एरिया से निकलने वाले कोयले को राज्य के विभिन्न साइडिंग और फैक्ट्री में भेजा जाता है।

कोयला ट्रांसपोर्टिंग करने के लिए ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों.यूनियनों द्वारा एक निश्चित दर तय कर दी गयी है। कांटा घरों में ट्रकों.हाइवा वाहनों को चालान दिया जाता है।

इसमें किस साइडिंग में कोयला गिराना है, टोटल वेट, एडवांस रकम लिखा होता है, लेकिन भाड़े की दर नहीं लिखी होती है। अब वाहन मालिकों से भाड़े की दर मौखिक तय होती है, जो तय दर से काफी अधिक होती है।

कोयला अनलोड होने के बाद वाहन मालिक चालान लेकर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कार्यालयों में जमा करते हैं, वहां भी पेपर के नाम पर बारह सौ रूपए प्रति चालान से अतरिक्त पैसा काटकर उनके खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिया जाता है।

वाहन किराया का क्या है खेल

वाहन मालिकों से औसत दर से भी कम दर पर भाड़ा देने के बाद प्रत्येक वाहन से पर चालान अतिरिक्त बारह सौ रुपया काट लिया जाता है। बाकी रकम खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

इस तरह प्रति ट्रक सिर्फ बारह सौ रूपए की कटौती की गणना की जाए तो औसतन हर रोज एनके.पिपरवार, अम्रापाली, मगध समित्रा एरिया से डेढ़ हजार वाहन कोयला निकलता है। ऐसे में हर रोज करीब अठारह लाख रुपये वसूली होती है। तय दर से कम दर पर वाहन मालिकों के भुगतान की गणना करने पर दूरी के हिसाब से पचास से सौ रुपए प्रति टन कम भुगतान होता है।

मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाई गई

मगध.एनके, पिपरवार एरिया से अवैध वसूली रोकने के लिए 18 जनवरी को चीफ जस्टिस अनिरुद्द बॉस, जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की बेंच ने सरकार को उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीआईडी के आईजी संगठित अपराध की अध्यक्षता में टीम बनाई गई है।

इन लोगों तक पहुंचता है पैसा

सीसीएल के अधिकारी, सीसीएल के कांटा बाबू, प्रशासन, सफेदपोश, उग्रवादी संगठन, दबंग कमिटी के अलावे अपराधी संगठन और केजीएफ जो अपराधी संगठन है उन लोगों तक दबंग कमिटी, कोयला ट्रांसपोर्टर और लिफ्टर पैसा पहुंचाते हैं।

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