
- बंगलुरु के ब्रंटन रोड पर स्थित इंडियन पेपर मनी म्यूजियम में रिजवान रजाक ने अपने विंटेज नोटों का कलेक्शन प्रदर्शित किया है
दयानंद राय
रांची : न्यूमिस्मैटिक्स की दुनिया में प्रेस्टीज समूह के एमडी रिजवान रजाक एक बड़ा नाम हैं। भारत के सबसे बड़े मुद्रा संग्राहकों में उनकी गिनती होती है। अपने मुद्रा के संग्रह का एक हिस्सा उन्होंने बंगलुरु के ब्रंटन रोड स्थित इंडियन पेपर मनी म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया है। मुद्राशास्त्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए इंटरनेशनल बैंक नोट सोसाइटी की ओर से हॉल ऑफ फेम अवार्ड भी दिया जा चुका है। यह अवार्ड हासिल करनेवाले वे पहले एशियाई शख्सियत हैं।

रिजवान रजाक बताते हैं कि उनके मुद्रा संग्रह में भारत में जारी किए गए सारे नोट हैं सिर्फ एक को छोड़कर जो यूनियन बैंक की ओर से जारी किया गया था। उनके मुद्रा के संग्रह में 1812 में बैंक ऑफ बंगाल की ओर से जारी पहली भारतीय करेंसी भी शामिल है।
रिजवान रजाक की मुद्राओं के प्रति दिलचस्पी सात साल की उम्र में ही जाग गयी थी। उनके दादा एक बार कपड़ों के बने बैग में पाकिस्तान रिफ्यूज्ड नोट लेकर आए थे। बाद में उन्होंने देखा कि उनके एक अंकल के पास ढाई रुपये के मूल्यवर्ग का नोट भी है। इन मुद्राओं ने उनकी मुद्रा संग्रह के प्रति दिलचस्पी बढ़ायी। इसके बाद उन्होंने भारतीय मुद्रा के बारे में जानने के लिए लाइब्रेरी जाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही उनके पास पुराने नोट परिवार के सदस्यों और परिचितों के पास से आने शुरू हो गये और उनके संग्रह का सिलसिला शुरू हो गया। आरबीआई के गवर्नर रहे वाइवी रेड्डी ने उन्हें अपनी ओर से हस्ताक्षरित छह नोटों का फ्रेम किया संग्रह भेंट किया। उनके पास चार हजार से ज्यादा पुराने विंटेज नोट हैं।

रिजवान रजाक ने मुद्राशास्त्र पर किताबें भी लिखीं हैं जो मुद्रा संग्रहकर्ताओं में बहुत लोकप्रिय हुई हैं। इसके अलावा उनके कई रिसर्च आर्टिकल भी जर्नल में पब्लिश्ड हैं। रिजवान रजाक हर दिन अपने तीन से चार घंटे का समय मुद्राशास्त्र के क्षेत्र में रिसर्च में देते हैं, वे कहते हैं कि अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो हम नहीं जानते।
