पहाड़ों और नदियों पर ठोस कानून बनाना अनिवार्य़ : सरयू राय

Archana Ekka
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जमशेदपुर : बिष्टुपुर में बुधवार को आयोजित आयोजन समिति की बैठक में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक और जाने-माने पर्यावरणविद सरयू राय ने कहा कि दो दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय सेमिनार में जलपुरुष राजेंद्र सिंह शिरकत करेंगे। आजादी के इतने साल बाद भी पहाड़ों के संरक्षण के लिए कोई कानून नहीं बना। वन विभाग ने कुछ कानून बनाए लेकिन वह मूलतः पहाड़ों के लिए नहीं हैं। नदियों के बारे में भी कोई कानून नहीं है। सिंचाई विभाग ने कुछ कानून बनाए लेकिन वो भी नदी केंद्रित नहीं है। नदी और पहाड़, दोनों के लिए कानून बनना चाहिए।

जो इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, वो सभी इस सेमिनार में आएंगे और अपना नजरिया बताएंगे। कानून कैसा होना चाहिए, इस संबंध में एक ड्राफ्ट की तैयारी पर काम चल रहा है। यह ड्राफ्ट नदी और पहाड़, दोनों के बारे में तैयार हो रहा है। कोशिश यही है कि एक ऐसा प्रारुप बनाया जाए, जिसे भारत सरकार के समक्ष रखा जा सके। अगर भारत सरकार को प्रारुप पसंद आता है, वह कानून बन जाता है तो हमारे पहाड़ बच जाएंगे, नदियां बच जाएंगी। ये आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वरदान साबित होगा।

सरयू राय ने 2006 का प्रसंग याद करते हुए कहा कि युगांतर भारती के बैनर तले जब वह स्वर्णरेखा के पानी के नमूने जमा कर रहे थे तो बहुतेरे लोग मजाक उड़ाते थे। लोग कहते थे कि क्या कर रहे हैं। आज का वक्त देखें। आज सबसे बड़ी चिंता स्वर्णरेखा के हेल्थ को लेकर है। स्वर्णरेखा नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई जिससे मछलियां मर रही हैं। इसी प्रकार जब आने वाले दिनों में पहाड़ों की चर्चा होगी तो लोग महसूस करेंगे कि हमारे जलवायु को नियंत्रित करने वाले पहाड़ ही हैं।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।