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इलेक्टोरल बांड पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से SG ने रखी अपनी राय, कहा…

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Debate on Electoral Bonds in SC: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने कोर्ट में राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे पर कहा कि डिजिटल पेमेंट की पसंद तेजी से बढ़ी है।

सब्जी बेचने वाले से लेकर E Rickshaw वाले तक डिजिटल पेमेंट ले रहे हैं। भारत में डिजिटल पेमेंट यूरोपियन यूनियन (Digital Payment European Union) से भी सात गुना ज्यादा है। चीन के मुकाबले तीन गुना अधिक।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहला कदम डिजिटाइजेशन और शेल यानी फर्जी कंपनियों के D Registration के रूप में उठाया गया।

इलेक्टोरल बांड पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से SG ने रखी अपनी राय, कहा… - SG expressed his opinion on behalf of the government in the Supreme Court on electoral bonds, said…

सॉलिसिटर जनरल ने कहा…

दो लाख 38 हजार 223 शेल यानी फर्जी कंपनियों को D Registered  किया। देश में 750 मिलियन मोबाइल इंटरनेट यूजर (Mobile Internet User) हैं। हर तीन सेकेंड में देश में नया इंटरनेट यूजर आ जाता है।

सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के आय के अनजान स्रोत बीस हजार रुपए से कम रकम के मामूली चंदा से आता है। ज्ञात स्रोत में सदस्यों का आजीवन सहयोग, मेंबरशिप, संपत्तियों के किराए, खरीद बिक्री आदि से होता है। सभी पार्टियों को क्लीन मनी की जरुरत होती है ताकि वो रैली जलसे आदि के खर्च के तौर पर दिखा सकें।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की अधिकतर आय अज्ञात स्रोतों से ही होती है। बीस हजार रुपए से कम का एकमुश्त चंदा (Lump Sum Donation) मिले तो कानूनन भी उसका रिकॉर्ड रखने या दिखाने की जरूरत या बाध्यता नहीं है। ADR निर्वाचन आयोग के पास जमा इन पार्टियों के हिसाब किताब का अध्ययन करता है।

इलेक्टोरल बांड पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से SG ने रखी अपनी राय, कहा… - SG expressed his opinion on behalf of the government in the Supreme Court on electoral bonds, said…

आय व्यय का ब्योरा

कई पार्टियां तो अपनी आय व्यय का ब्योरा आयोग (Commission Details of Income and Expenditure) को देते ही नहीं। कई आधी अधूरी जानकारी देते हैं। कुछ पार्टियां तो पिछले कई वर्षों से यही हिसाब देती रही हैं कि उनको बीस हजार रुपए से ज्यादा रकम का चंदा किसी ने भी नहीं दिया।

SG ने कहा कि पिछले कई दशकों से देखा जा रहा है कि सत्ताधारी दल को चंदा ज्यादा मिलता है उनकी आय कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। CJI ने इसका कारण पूछा कि क्या वजह है सत्ता में आने वाली या आ चुकी पार्टियों को चंदा की मात्रा बढ़ जाती है?

SG ने कहा कि मेरा निजी तौर पर मानना है कि कई बार तो चंदा दाताओं को उस पार्टी को सरकार में बिजनेस के अनुकूल स्थितियां लगती हैं। कॉरपोरेट (Corporate) को अपने कारोबार को बढ़ाने में लालफीताशाही की कमी, प्रक्रियागत आसानी, कम परेशानी, बिजनस के ज्यादा आयाम अवसर मिलने की उम्मीद रहती है।

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