सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून की सुनवाई के दौरान सिख समुदाय की याचिका सुर्खियों में रही

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Sikh petition surfaces in SC’s Waqf Act hearing : वक्फ संशोधन कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली 70 से अधिक याचिकाओं की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। इसी बीच सिख समुदाय द्वारा लगाई गई याचिका भी सुर्खियों में रही।

गुड़गांव के गुरुद्वारा सिंह सभा के अध्यक्ष दया सिंह ने वक्फ कानून के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन बताया है।
वक्फ कानून को संविधान के खिलाफ बताते हुए गुरुद्वारा सभा के अध्यक्ष दया सिंह ने दलील दी है कि गैर-मुसलमानों द्वारा वक्फ के नाम पर दान करने की परंपरा पर यह संशोधन सीधा प्रतिबंध है।

सिख धर्म में भी यह परंपरा है कि अन्य धर्मों के लोगों से बिना भेदभाव के दान लिया जाता है। जबकि नया वक्फ कानून इस तरह के दान को रोकता है और इसे मुस्लिम समुदाय तक सीमित करता है, जो संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरात्मा की आवाज के खिलाफ है।

दया सिंह ने तर्क दिया है कि किसी व्यक्ति की संपत्ति पर उसकी मर्जी से दान देने का अधिकार राज्य नहीं छीन सकता, भले ही वह किसी भी धर्म का क्यों न हो। यह कानून उस संपत्ति स्वायत्तता के अधिकार को बाधित करता है, जो नागरिकों को संविधान से मिला है।

दया सिंह का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां किसी भी नागरिक को धार्मिक पहचान के आधार पर दान देने या ट्रस्ट बनाने से रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि इस कानून में केवल मुस्लिमों को ही वक्फ के तहत संपत्ति देने की अनुमति देना समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है।
इसके साथ ही दया सिंह ने अपने याचिका के जरिए सवाल उठाया कि जब हिंदू और सिख धर्मस्थल अपनी संपत्तियों का प्रबंधन खुद करते हैं, तो फिर सिर्फ मुस्लिम संस्थाओं के लिए सरकार द्वारा अलग और कठोर नियम बनाना क्यों जरूरी समझा गया?

कुल मिलाकर दया सिंह की याचिका ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है कि क्या धार्मिक संस्थानों के मामलों में सरकार की दखलअंदाजी संविधान के अनुरूप है या नहीं?

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