Organized a Special Workshop on Digital Health: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत सोमवार को सिविल सर्जन रांची (Civil Surgeon Ranchi) के कार्यालय में छोटे क्लीनिकों और निजी अस्पतालों के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले के छोटे स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना और उन्हें HMIS (हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) के उपयोग के बारे में सरल तरीके से जानकारी देना था।
कार्यक्रम में रांची जिले के कई निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और छोटे क्लीनिकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भागीदारी
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को बताया गया कि Digital तकनीक अपनाने से अस्पताल और क्लीनिक का काम आसान और व्यवस्थित हो जाता है।
मरीजों से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रहती है और इलाज की प्रक्रिया भी तेज होती है। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल सिस्टम से मरीजों और डॉक्टरों दोनों को लाभ मिलेगा।
HMIS अपनाने पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम में खास तौर पर छोटे क्लीनिकों को HMIS अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने समझाया कि HMIS के जरिए मरीजों का पंजीकरण, ओपीडी प्रबंधन और मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में संभालना आसान हो जाता है। इससे कागजी काम कम होता है और समय की भी बचत होती है।
CDAC लाइट एप से कम खर्च में डिजिटल सुविधा
कार्यशाला में भारत सरकार के उपक्रम सीडैक द्वारा विकसित CDAC लाइट एप की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि मात्र 299 रुपये के रिचार्ज से छोटे क्लीनिक और निजी अस्पताल इस एप के माध्यम से अपना HMIS संचालित कर सकते हैं। यह एप छोटे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए काफी उपयोगी बताया गया।
CDAC लाइट एप के जरिए मरीज पंजीकरण, ओपीडी प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं को डिजिटल किया जा सकता है।
इससे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल स्वास्थ्य से बढ़ेगी पारदर्शिता और गुणवत्ता
कार्यशाला की अध्यक्षता सिविल सर्जन रांची ने की। इस दौरान आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के ज्वाइंट डायरेक्टर राजन कुमार सहित राज्य स्तर के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने कहा कि छोटे क्लीनिकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और उन्हें डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली अपनाने से जुड़ी जरूरी तकनीकी जानकारी भी दी गई।




