Supreme Court on Religious Conversion : रांची से जुड़ी एक अहम कानूनी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG में Admission के लिए धर्म परिवर्तन कर बौद्ध बनने के मामले को गंभीरता से लिया है।
सामान्य जाति के उम्मीदवार निखिल कुमार पुनिया और एकता की ओर से Supreme Court में याचिका दायर की गई थी।

याचिका में कहा गया कि दोनों ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया है और अब वे उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में बौद्ध कोटे के तहत दाखिला लेना चाहते हैं।
किस पीठ ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कई सवाल पूछे और उनके दावों पर कड़ी टिप्पणी की।
याचिका में क्या कहा गया
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने विधिवत धर्म परिवर्तन कर लिया है और वे अब बौद्ध हैं।
इसके समर्थन में संबंधित अनुमंडल अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। याचिका में यह भी मांग की गई कि उन्हें बौद्ध कोटे के तहत Medical College में एडमिशन दिया जाए।

कोर्ट के सवाल और नाराजगी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि याचिकाकर्ता पुनिया किस जाति से आते हैं। इस पर बताया गया कि वे जाट जाति के हैं। इसके बाद Court ने सवाल उठाया कि अगर वे जाट हैं, तो अल्पसंख्यक कैसे हो सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि यह अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का एक तरीका लगता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि NEET-PG की परीक्षा में खुद को सामान्य जाति बताने के बाद बौद्ध कैसे बन गए।
धर्म परिवर्तन पर कड़ी टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि यह तरीका धोखाधड़ी जैसा है। उन्होंने कहा कि आपको अपनी पहचान और योग्यता पर गर्व होना चाहिए।
वंचित वर्गों के अधिकार इस तरह नहीं छीने जा सकते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि उसे और कड़ी टिप्पणी करने के लिए मजबूर न किया जाए।
सरकार से मांगी गई रिपोर्ट
Supreme Court ने इस पूरे मामले में हरियाणा सरकार से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से यह बताने को कहा है कि अल्पसंख्यक जाति का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए क्या दिशा-निर्देश हैं।
रिपोर्ट में क्या बताना होगा
कोर्ट ने कहा है कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि NEET-PG में सामान्य जाति घोषित करने के बाद क्या बौद्ध अल्पसंख्यक बनने की अनुमति दी जा सकती है।
साथ ही यह भी बताया जाए कि अगर अनुमति नहीं है, तो एसडीओ द्वारा बौद्ध अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किया गया।




