झारखंड के गवर्नर ने रिजर्वेशन बढ़ाने संबंधी विधेयक को लौटाया,जानिए क्या दिया तर्क…

ऐसे में उस राय को ध्यान में रखते हुए बिल को समीक्षा के लिए पिछले महीने सरकार के पास वापस भेज दिया गया था। जानकारी हो कि यह बिल नवंबर महीने में पारित किया गया था

News Desk
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रांची: झारखंड (Jharkhand) में हेमंत सरकार के लिए क्या यह एक झटका है, ऐसी चर्चा मीडिया में होने लगी है। अपडेट खबर (Update News) यह आ रही है कि झारखंड के राज्यपाल CP राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) ने राज्य में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण (Reservation) बढ़ाने संबंधी विधेयक को वापस कर दिया है।

यह विधेयक फाइनली कानून बनने पर अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे को 14% से बढ़ाकर 27% और अनुसूचित जनजाति के कोटे को 26% से बढ़ाकर 28% और अनुसूचित जाति को 10% से 12% करना सुनिश्चित करता है।

यह बिल पारित होता है तो राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण को शामिल करने के साथ सरकार की नौकरियों में कुल आरक्षण 77 प्रतिशत हो जाएगा।

भारत के अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय के आधार पर लौटाया गया बिल

इस मामले में अधिक जानकारी देते हुए राज्यपाल के कार्यालय के अधिकारी ने कहा कि यह बिल भारत के अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय के आधार पर लौटाया गया है। झारखंड (Jharkhand) के पिछले राज्यपाल रमेश बैस ने इस बिल को अटॉर्नी जनरल को भेजा था।

उन्होंने कहा है कि बिल आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसलों को ध्यान में नहीं रखा गया है। ऐसे में उस राय को ध्यान में रखते हुए बिल को समीक्षा के लिए पिछले महीने सरकार के पास वापस भेज दिया गया था। जानकारी हो कि यह बिल नवंबर महीने में पारित किया गया था।

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