झारखंड

झारखंड हाई कोर्ट में हजारीबाग के बहुचर्चित ढेंगा गोलीकांड मामले की हुई सुनवाई

कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नारागी जताई, गृह सचिव को 8 जुलाई को सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया

रांची : झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) के न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत में शुक्रवार को हजारीबाग के बहुचर्चित ढेंगा गोलीकांड मामले की सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय द्विवेदी ने गृह सचिव को आगामी 8 जुलाई को सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ता मंटू सोनी की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक कृष्ण गुप्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा। रिट संख्या 127/2021 जो मंटू सोनी के द्वारा दाखिल की गई थी।

प्रार्थी के मुताबिक, पुलिस ने इन्हें गोली मारी थी। इसके बाद उन्होंने पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया, लेकिन उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और उल्टे उनके ऊपर ही केस दर्ज कर दिया गया।

प्रार्थी के अधिवक्ता के मुताबिक़, सरकार की ओर से बार-बार इस मामले में समय मांगा जा रहा था। सरकार के रवैये पर कोर्ट ने नाराजगी भी ज़ाहिर की है।

कोर्ट में मंटू सोनी की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक कृष्ण गुप्ता ने यह कहा था कि मंटू सोनी पीड़ित है। मगर पुलिस ने उसे ही अभियुक्त बना दिया है।

मंटू सोनी सहित अन्य घायल हुए

मंटू सोनी गोली से घायल हुए थे। हजारीबाग सदर अस्पताल (Sadar Hospital) में इलाज कराने के दौरान पुलिस ने उसे बड़कागांव थाना कांड संख्या 167/15 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

पुलिस केस से लेकर कोर्ट में दिए चार्जशीट तक पुलिस ने मंटू सोनी के गन शॉट से घायल होने और उसके बयान का जिक्र तक नहीं किया है।

विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में भी पुलिस ने मंटू सोनी के घायल होने से इनकार कर दिया था। बाद में एक अन्य सवाल में पुलिस ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि उक्त घटना में मंटू सोनी सहित अन्य घायल हुए थे।

विधानसभा (Assembly) में सरकार के द्वारा विरोधाभासी जवाब पर पुलिस ने हाई कोर्ट में कोई जवाब नहीं दिया।

मंटू सोनी द्वारा जेल से लिखे पत्र के आधार पर निचली अदालत द्वारा पुलिस को मामला दर्ज करने के आदेश देने के एक साल बाद बड़कागांव कांड संख्या 214/16 दर्ज किए जाने के आरोप पर भी पुलिस (Police) ने अबतक कोई जवाब नहीं दिया है।