‘बाबरी मस्जिद’ के नीचे कोई राम मंदिर नहीं था, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आरएफ नरीमन ने कही बड़ी बात

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Judge RF Nariman Said a Big Thing: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आरएफ नरीमन (RF Nariman) एक बयान से विवाद खड़ा हो गया है।

उन्होंने कहा है कि राम मंदिर और बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) की कानूनी लड़ाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था वह सेकुलरिज्म के सिद्धातों के खिलाफ था।

उन्होंने इसे न्याय का मजाक करार दिया और कहा कि खुद Supreme Court ने ये बात मानी थी कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई राम मंदिर नहीं था।

इस कार्य में 50 से अधिक सदस्यों का टीम बनाया गया

पूर्व जज के दावों को जानने के लिए हमने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उस रिपोर्ट को समझने की कोशिश की है, जिसके आधार पर राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया गया था।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 2003 में अयोध्या के तत्कालीन विवादित स्थल पर खुदाई का काम किया था।

इसकी शुरुआत ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (Ground-Penetrating Radar) तकनीक से हुई थी। इसका उद्देश्य जमीन के नीचे किसी संभावित ऐतिहासिक संरचना या मानव निर्मित वस्तु की पहचान करना था।

GPR तकनीक से मिले संकेतों को अनुमानित अनियमितताएं कहा गया। इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खुदाई की अनुमति दी।

12 मार्च 2003 को शुरू हुई यह खुदाई लगभग पांच महीने तक चली। 7 अगस्त 2003 को समाप्त इस कार्य में ASI की 14 सदस्यीय टीम को बढ़ाकर 50 से अधिक सदस्यों का बनाया गया। खुदाई स्थल पर सुरक्षा बल, स्निफर डॉग्स और अदालती मामले में शामिल 25 पार्टियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे।

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