National Conference of Congress : दिल्ली स्थित जवाहर भवन में 22 जनवरी को कांग्रेस पार्टी द्वारा राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन (National Workers Conference) का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

सम्मेलन का उद्देश्य देशभर के मजदूरों की समस्याओं को सामने लाना और उनके अधिकारों की बात करना था। कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से श्रमिक संस्कृति को दिखाया गया, जिससे मंच का माहौल खास रहा।
एकजुटता से ही बदलाव संभव
सम्मेलन को संबोधित करते हुए Rahul Gandhi ने कहा कि मौजूदा हालात को बदलने का एकमात्र रास्ता सभी का एकजुट होना है।
उन्होंने कहा कि देश में सबसे बड़ी कमी एकता की है। अगर लोग एक साथ खड़े हो जाएं, तो बड़े बदलाव संभव हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि एकजुटता होने पर प्रधानमंत्री मोदी को पीछे हटना पड़ेगा और देश फिर से मनरेगा जैसे रोजगार कार्यक्रमों की ओर लौटेगा।

गरीबों के हक पर सवाल
Rahul Gandhi ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नए कानूनों से गरीबों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को BBC GMRG जैसे बिलों की सही जानकारी नहीं है और यह गरीबों के हक पर हमला है। उन्होंने मजदूरों और गरीबों से इन नीतियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
श्रमिक संस्कृति का संदेश
इस सम्मेलन में राहुल गांधी और Mallikarjun Kharge ने सिर पर गमछा बांधा, कंधे पर कुदाल रखी और देश के अलग-अलग हिस्सों से लाई गई मिट्टी पौधों में डाली।
यह कदम मजदूरों के सम्मान और उनके योगदान को दर्शाने के लिए उठाया गया।
मनरेगा और कानून वापसी की मांग
अपने संबोधन में Mallikarjun Kharge ने कहा कि जब तक मोदी सरकार नया कानून वापस नहीं लेती और मनरेगा को पूरी तरह बहाल नहीं करती, तब तक कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि देश को दो लोग चला रहे हैं—नरेंद्र मोदी और अमित शाह—जो जनता के हित में काम करने के बजाय चुनाव प्रचार में व्यस्त रहते हैं।
सरकार पर तीखे आरोप
खड़गे ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े वादे करती है, जैसे बुलेट ट्रेन, लेकिन हकीकत में नई पटरियां तक नहीं बिछ पाई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के लिए कोई ठोस काम नहीं कर पाई, लेकिन हर जगह प्रचार करती नजर आती है।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात
अंत में Rahul Gandhi ने कहा कि मौजूदा सरकार संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करना चाहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश को आज़ादी से पहले के दौर में ले जाना चाहती है, जहां सभी फैसले एक व्यक्ति करता था। उनका कहना था कि BJP फिर से वैसा ही भारत बनाना चाहती है, जिसे देश स्वीकार नहीं करेगा।
यह सम्मेलन मजदूरों की आवाज़, एकजुटता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देकर समाप्त हुआ।




