2023-24 में भारत का GDP 6.5 % रहने का अनुमान, लंदन में RBI गवर्नर ने…

News Aroma Media
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नई दिल्ली : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने मंगलवार को विश्वास जताया कि भारत 2023 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं (Economy) में से एक होगा, जो चालू वित्तवर्ष (Financial Year) में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा।

2023-24 तक भारत की बेहतरीन आर्थिक वृधि

RBI गवर्नर ने लंदन में सेंट्रल बैंकिंग द्वारा आयोजित समर मीटिंग्स में शुरुआती भाषण देते हुए कहा, हम 2023-24 के दौरान वास्तविक जीडीपी में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद करते हैं।

पूरी संभावना है कि भारत 2023 में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (Economy) में से एक रहेगा।

महामारी के चंगुल से उभरा भारत

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने महामारी (Epidemic) के बाद अनुकरणीय लचीलापन (Flexiblity) प्रदर्शित किया और 2020-21 में 5.8 प्रतिशत के संकुचन से 2021-22 में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि और 2022-23 में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जोरदार वापसी की।

और राजकोषीय (Fiscal) और मौद्रिक नीतियों (Monetary Policies) की समन्वित प्रतिक्रिया ने त्वरित सुधार का पोषण किया।

Digitization से हुआ काम आसान

उन्होंने कहा कि बैंकिंग, Digitization, कराधान, विनिर्माण (Manufacturing) और श्रम से संबंधित विभिन्न संरचनात्मक सुधारों को पिछले कुछ वर्षो में लागू किया गया है, जिसने मध्यम और दीर्घावधि में मजबूत और सतत विकास की नींव रखी है।

उन्होंने कहा, सरकार का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर लगातार जोर अतिरिक्त क्षमता पैदा कर रहा है और कॉर्पोरेट निवेश में बहुप्रतीक्षित पुनरुद्धार का पोषण कर रहा है।

आत्मनिर्भरता से हुआ भारत का विकास

दास ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने भी खुलेपन में तेजी से लाभ कमाया है और पिछले कुछ वर्षो में धीरे-धीरे वैश्विक (Global) अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत हो गई है।

नतीजतन, यह तेजी से वैश्विक विपरीत परिस्थितियों के सामने आ रहा है।

हालांकि, यह ध्यान रखना उचित है कि पिछले कुछ वर्षो में भारत की वृद्धि मुख्य रूप से वैश्विक मंदी के बीच मजबूत घरेलू मांग, विशेष रूप से निजी खपत और निवेश से प्रेरित है।

RBI गवर्नर ने आगे कहा कि संकट के दौरान सक्रिय और फुर्तीले होने से किसी को तेजी से विकसित हो रहे घटनाक्रमों का तेजी से जवाब देने की फुर्ती मिलती है।

Share This Article