रांची में मापतौल विभाग के संयुक्त नियंत्रक कृष्णा चंद्र चौधरी पर फर्जीवाड़ा और ब्लैकमेल का केस

यह मामला मापतौल विभाग की कार्यप्रणाली और आंतरिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगने से विभाग की साख प्रभावित हो सकती है। साथ ही, यह घटना सरकारी विभागों में आंतरिक साजिश और ब्लैकमेलिंग की घटनाओं पर भी प्रकाश डालती है।

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Ranchi Fraud Case: राजधानी रांची के कडरू स्थित मापतौल विभाग के संयुक्त नियंत्रक कृष्णा चंद्र चौधरी के खिलाफ फर्जीवाड़ा और ब्लैकमेलिंग के आरोप में कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया है। यह शिकायत चाईबासा में मापतौल विभाग के सहायक नियंत्रक मीर कासिम अंसारी ने दर्ज कराई है। अंसारी ने आरोप लगाया कि चौधरी ने सात साल पुरानी रिपोर्ट का दुरुपयोग कर उन्हें ब्लैकमेल करने और विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की।

क्या है पूरा मामला?

मौर कासिम अंसारी के मुताबिक, 4 अप्रैल 2025 को उन्हें इंडिया पोस्ट से एक मैसेज मिला। जांच करने पर पता चला कि उनके नाम पर किसी ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग के सचिव को एक पत्र भेजा था। अंसारी ने तुरंत इसकी सूचना सचिव को दी। इसके बाद, 7 अप्रैल को वह GPO रांची पहुंचे और CCTV फुटेज की मदद से मामले की पड़ताल की। फुटेज में साफ हुआ कि संयुक्त नियंत्रक कृष्णा चंद्र चौधरी 4 अप्रैल को एक लिफाफा लेकर स्पीड पोस्ट करने जीपीओ पहुंचे थे।

सचिव को आवेदन, सात साल पुरानी रिपोर्ट का खुलासा

मामले की गहराई से जांच के लिए अंसारी ने 9 अप्रैल को सचिव को एक आवेदन दिया। इसके बाद उन्हें सचिव को भेजे गए पत्र की जानकारी मिली, जिसमें पता चला कि यह पत्र सात साल पुरानी एक रिपोर्ट थी, जिसे अंसारी ने पहले तैयार किया था। अंसारी का आरोप है कि इस रिपोर्ट को जानबूझकर भेजकर उनके खिलाफ साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि इस फर्जीवाड़े के जरिए न केवल उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई, बल्कि मापतौल विभाग और उनकी व्यक्तिगत छवि को भी धूमिल करने का प्रयास हुआ।

पुलिस में शिकायत, जांच शुरू

अंसारी की शिकायत पर कोतवाली थाने में कृष्णा चंद्र चौधरी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की पड़ताल की जा रही है। अंसारी ने मांग की है कि इस साजिश के पीछे के मकसद और शामिल लोगों का खुलासा किया जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

विभागीय साख पर सवाल

यह मामला मापतौल विभाग की कार्यप्रणाली और आंतरिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगने से विभाग की साख प्रभावित हो सकती है। साथ ही, यह घटना सरकारी विभागों में आंतरिक साजिश और ब्लैकमेलिंग की घटनाओं पर भी प्रकाश डालती है।

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