
Jharkhand News: झारखंड में कुड़मी (कुरमी) समाज की लंबे समय से चली आ रही ST (अनुसूचित जनजाति) स्टेटस की लड़ाई ने शनिवार को आग पकड़ ली। हावड़ा-मुंबई रेल रूट के सीनी रेलवे स्टेशन के पास सैकड़ों प्रदर्शनकारी ट्रैक पर बैठ गए, जिससे कई ट्रेनें घंटों ठहर गईं। लगभग 500 से ज्यादा लोग धरने में शामिल हैं – ज्यादातर महिलाएं और छोटे बच्चे, जो इसे शांतिपूर्ण संघर्ष बता रहे हैं।
लेकिन पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच टेंशन भी हाई रहा। प्रशासन ने पहले BNS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 163 लगाकर किसी को ट्रैक तक न पहुंचने देने का दावा किया था, लेकिन भीड़ के दबाव में पीछे हट गए।
क्या है ‘रेल टेका डहर छेका’ का पूरा प्लान? ST के लिए अनिश्चितकालीन ब्लॉक
आंदोलन का नाम ‘रेल टेका डहर छेका’ (रेल पकड़ो, रास्ता रोक दो) है, जो आदिवासी कुड़मी समाज के बैनर तले चल रहा। धरने में शामिल नवीन महतो ने कहा, “कुड़मी समाज पहले ST लिस्ट में था, लेकिन साजिश के तहत हटा दिया गया। सालों से मांगें अनसुनी हैं, अब इंतजार नहीं करेंगे।”
ये आंदोलन सिर्फ सरायकेला तक सीमित नहीं – झारखंड के 40 से ज्यादा स्टेशनों पर रेल रोको प्लान है, जैसे मूरी, गोमो, चंदिल, हंसडीहा, दुमरी, परसनाथ। वेस्ट बंगाल (पुरुलिया, झारग्राम) और ओडिशा में भी ब्लॉकेड हो रहे हैं। मांगें क्लियर: कुड़मी को ST स्टेटस दो और कुर्माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करो।
रेलवे अफसरों के मुताबिक, साउथ ईस्टर्न रेलवे (SER) और ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ECR) के धनबाद डिवीजन में सर्विसेज पार्शियली प्रभावित हैं। 9 ट्रेनें कैंसल, 7 का रूट चेंज हो चुका। यात्रियों को खासी परेशानी – कुछ घंटों से प्लेटफॉर्म पर फंसे हैं। पुलिस भीड़ हटाने की कोशिश कर रही, लेकिन शांतिपूर्ण रखने का दावा कर रही।
