6th Death Anniversary of Khagendra Thakur : रांची में मूर्धन्य आलोचक, साहित्यकार और विचारक डॉ. खगेंद्र ठाकुर की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य कार्यालय स्थित सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस मौके पर पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पूरा माहौल गंभीर और भावनात्मक रहा।

श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत Dr. Khagendra Thakur के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने उनके साहित्यिक और वैचारिक योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
बौद्धिक आंदोलन को हुई गहरी क्षति
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह जिला मंत्री अजय सिंह ने कहा कि डॉ. खगेंद्र ठाकुर के निधन से देश और विशेष रूप से झारखंड के बौद्धिक आंदोलन को गहरा नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि डॉ. ठाकुर के विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं।
हिंदी साहित्य में बहुआयामी योगदान
वक्ताओं ने कहा कि Dr. Khagendra Thakur हिंदी साहित्य की कई विधाओं में सक्रिय रहे। उन्होंने आलोचना, व्यंग्य, कविता और संस्मरण के क्षेत्र में सशक्त लेखन किया। उनकी रचनाएं आज भी पाठकों को सोचने और समझने के लिए प्रेरित करती हैं।
सादगी और आत्मसंयम था उनकी पहचान
सभा में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला। बताया गया कि डॉ. ठाकुर का जीवन बेहद सादा और अनुशासित था। वे दिखावे और आडंबर से दूर रहते थे और अपने निजी जीवन को सार्वजनिक मंच से अलग रखते थे।
प्रमुख कृतियों को किया गया याद
डॉ. खगेंद्र ठाकुर की प्रमुख आलोचनात्मक कृतियों में ‘विकल्प की प्रक्रिया’, ‘आज का वैचारिक संघर्ष : मार्क्सवाद’, ‘आलोचना के बहाने’ और ‘समय’ शामिल हैं।
वहीं उनके कविता संग्रह ‘धार एक व्याकुल’ और ‘रक्त कमल परती’ को भी विशेष रूप से याद किया गया।
पार्टी नेता और साहित्यप्रेमी रहे मौजूद
इस अवसर पर CPI राज्य सचिव महेंद्र पाठक, जिला सचिव अजय सिंह, किरण कुमारी, अरुण गुप्ता, वीरेन्द्र विश्वकर्मा, मनोज ठाकुर, श्यामल, भारती जी, विजय वर्मा, राजेश यादव, योगेन्द्र बेनी सहित दर्जनों पार्टी कार्यकर्ता और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे। सभी ने उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।




