रांची: छत्तीसगढ़ में सामने आए शराब घोटाले से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तीन अहम याचिकाएं विचाराधीन हैं। यह याचिकाएं आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज प्राथमिकी और जांच से संबंधित हैं। इन याचिकाओं में एक तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, दूसरी संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह और तीसरी विकास सिंह की ओर से दाखिल की गई है। तीनों मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार अग्रवाल की पीठ ने की।
CBI जांच को लेकर कोर्ट ने मांगी स्थिति स्पष्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह सवाल उठा कि क्या इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है या नहीं। इस पर कोर्ट ने CBI से शपथ पत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके जवाब में 21 जनवरी को हुई सुनवाई में छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता ने CBI, रायपुर द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की।

CBI ने जांच से किया इनकार
महाधिवक्ता द्वारा सौंपे गए पत्र में यह साफ किया गया कि CBI ने झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच करने से इनकार कर दिया है। CBI ने अपने पत्र में बताया कि इस मामले में उसे केंद्र सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है, इसलिए वह जांच के लिए इच्छुक नहीं है। इसी कारण CBI ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भेजा गया पत्र भी लौटा दिया।
EOW और ED कर रही हैं जांच
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी, जब रांची (अरगोड़ा) निवासी विकास सिंह ने छत्तीसगढ़ EOW में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने सुनियोजित तरीके से झारखंड में भी शराब घोटाले को अंजाम दिया है। इस शिकायत के आधार पर EOW ने प्राथमिकी दर्ज की। फिलहाल इस मामले की जांच EOW छत्तीसगढ़ और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है।
सरकार से अनुमति नहीं मिलने पर बढ़ा मामला
EOW ने इस केस में विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के खिलाफ PC एक्ट की धारा 17A के तहत झारखंड सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। इस विषय को भी कोर्ट के सामने रखा गया।
अगली सुनवाई का इंतजार
सुनवाई के अंत में महाधिवक्ता ने बताया कि वह अगले हफ्ते कोर्ट के सामने मामले के मेरिट पर अपनी बात रखना चाहते हैं। इसके बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए मामले को आगे के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

इस तरह, शराब घोटाले से जुड़ा यह मामला अब भी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बीच बना हुआ है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।




