JHARKHAND POLITICS: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, अवैध खनन और एयर एंबुलेंस सेवा में घोटाले के मुद्दे पर घेरा

Archana Ekka
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Babulal Marandi Attacks Hemant Government: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने हेमंत सोरेन सरकार पर अवैध खनन और एयर एंबुलेंस सेवा में कथित घोटाले को लेकर हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि राज्य में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमले की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।

उन्होंने पाकुड़ जिले की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जिला परिवहन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार चौधरी द्वारा अवैध बालू परिवहन (Illegal Sand Transportation) कर रहे दो ट्रैक्टरों को जब्त करने की कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की।

अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर हो रहे हमले

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। पूर्व में भी कई जिलों में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर हमले हुए हैं। यहां तक कि खनन रोकने पहुंचे अधिकारियों को कुचलने तक का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला करना केवल स्थानीय माफियाओं के बस की बात नहीं है। मुख्यमंत्री के संरक्षण में संचालित एक बड़े सिंडिकेट का परिणाम है, जो चाईबासा से संताल और पलामू से कोल्हान तक सक्रिय है।

उन्होंने पाकुड़ पुलिस से मांग की कि बिना किसी राजनीतिक दबाव के हमलावरों और अवैध खनन Syndicate से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अधिक राशि लेकर कैसे गई एयर एंबुलेंस

Babulal Marandi ने राज्य सरकार की एयर एंबुलेंस सेवा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इसे सरकार की बहुप्रचारित योजना के रूप में पेश किया गया था, लेकिन तीन दिन पहले हुए हादसे के बाद इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि एयर एंबुलेंस सेवा प्रदान करने वाली कंपनी ने एक मरीज को 30 प्रतिशत से अधिक बर्न इंजरी का हवाला देकर सरकारी Subsidy देने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में 5 लाख की जगह 8 लाख रुपये किराया तय होने पर उसे दिल्ली ले जाने के लिए तैयार हो गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 30 प्रतिशत से अधिक बर्न इंजरी की स्थिति में हवाई यात्रा असुरक्षित है, तो अधिक राशि लेकर उसी मरीज को ले जाने की अनुमति कैसे दी गई?

नहीं मिल रहा लोगों को योजना का लाभ

उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार ने आखिर 30 प्रतिशत बर्न इंजरी तक ही Subsidy देने का निर्णय क्यों लिया और क्या इसमें किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की स्पष्ट राय शामिल थी।

साथ ही आरोप लगाया कि 28 अप्रैल 2023 से शुरू हुई इस सेवा का लाभ अब तक बमुश्किल एक दर्जन लोगों को ही मिला है, जिनमें चार मंत्री भी शामिल बताए जाते हैं। इस वर्ष के बजट में इसके लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जरूरत पड़े तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और अब तक वसूले गए किराए की पारदर्शी समीक्षा की जाए।

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