
रांची : झारखंड में डीजीपी नियुक्ति को लेकर UPSC ओर राज्य सरकार में तनातनी बढ़ती नजर आ रही है. अब यूपीएससी ने सरकार को पत्र लिखकर डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई है. आयोग ने कहा है कि 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर 2025 से सेवानिवृत्त मानी जाएगी। इसके साथ ही आयोग ने कहा है कि तदाशा मिश्रा को दिया गया सेवा विस्तार नियमों के मुताबिक नहीं है। यूपीएससी ने इस विस्तार को अवैध बताते हुए राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नई नियमावली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
आयोग ने अपने पत्र में दो टूक कहा है कि डीजीपी की नियुक्ति सिर्फ यूपीएससी द्वारा तैयार किए गए पैनल के आधार पर ही हो सकती है। इसके लिए राज्य सरकार को योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची आयोग को भेजनी होगी। उसी सूची में से चयन कर पैनल तैयार किया जाएगा इसके बाद फिर अंतिम नियुक्ति होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि तय प्रक्रिया से हटकर की गई कोई भी नियुक्ति वैध नहीं मानी जाएगी।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब तदाशा मिश्रा की रिटायरमेंट से ठीक दो दिन पहले राज्य सरकार ने डीजीपी नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव कर उन्हें दो साल का सेवा विस्तार दे दिया। उस वक्त भी इस फैसले पर सवाल उठे थे, लेकिन अब यूपीएससी ने आधिकारिक तौर पर इस पर आपत्ति दर्ज कर दी है।
पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद
यहां बताते चलें कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार के फैसले पर आयोग ने आपत्ति जताई हो। इससे पहले 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को भी रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार दिया गया था। उस समय भी यूपीएससी ने इस फैसले को नियमों के खिलाफ बताया था। बाद में अनुराग गुप्ता को हटाकर तदाशा मिश्रा को पहले प्रभारी डीजीपी बनाया गया। फिर उनकी सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले उन्हें नियमित डीजीपी नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। अब इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
