
झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक पारित किए जाने का प्राध्यापक संघ ने किया स्वागत
रांची : नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक पारित किए जाने पर राज्य सरकार के सराहनीय कदम का स्वागत किया है। संघ के अध्यक्ष डॉ. त्रिभुवन कुमार साही ने बुधवार को अपने वक्तव्य में कहा कि यह विधेयक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल है, जिससे विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे में सुधार तथा कार्यकुशलता में वृद्धि की उम्मीद है।
डॉ. साही ने यह भी कहा कि विधेयक में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ इसके क्रियान्वयन को समयानुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि झारखंड में कई सकारात्मक पहलें देर से प्रारंभ होती हैं और विभिन्न कारणों से लंबे समय तक लंबित रहती हैं। अतः यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस विधेयक के प्रावधानों को समयबद्ध तरीके से प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
संघ ने विशेष रूप से उन नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों के स्थायीकरण की मांग उठाई है, जो विश्वविद्यालयों द्वारा वर्ष 2018 से सरकार के पत्रांक एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियुक्त हैं। संघ का मानना है कि इन शिक्षकों ने लंबे समय से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए इनके स्थायीकरण के लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग तथा संबंधित बोर्ड की ओर से विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
डॉ. साही ने आगे कहा कि राज्य सरकार यदि इन नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों के स्थायीकरण की दिशा में ठोस निर्णय लेती है, तो यह न केवल शिक्षकों के हित में होगा, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करेगा। संघ ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह कल्याणकारी दृष्टिकोण अपनाते हुए उच्च शिक्षा में कार्यरत सभी नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शीघ्र और सकारात्मक निर्णय ले।

