
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए पति को तलाक की अनुमति दे दी है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि पति अपनी पत्नी को 30 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता के रूप में दे। कोर्ट ने यह भी माना कि पत्नी की कोई स्वतंत्र आय नहीं है, इसलिए उसके भविष्य को सुरक्षित रखना जरूरी है।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी को वही जीवन स्तर मिलना चाहिए, जैसा वह शादी के दौरान जी रही थी। कोर्ट ने पति की आय और भविष्य की कमाई को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। यह भी तय किया गया कि 30 लाख रुपये की राशि तीन बराबर किस्तों में 12 महीने के भीतर दी जाएगी।
यह मामला अपील से जुड़ा था, जिसमें पति अर्जुन मांझी (बदला हुआ नाम) ने पत्नी मंगली देवी (बदला हुआ नाम) से तलाक की मांग की थी। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट, बेरमो (बोकारो) के फैसले को रद्द करते हुए विवाह को समाप्त घोषित कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बेटे का पैतृक संपत्ति पर अधिकार बना रहेगा और वह कानून के अनुसार अपना हक मांग सकता है। इस फैसले को वैवाहिक मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
