
साहित्य का काम लोगों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं-डॉ. जे.बी. पाण्डेय
रांची: राजधानी रांची में साहित्य प्रेमियों के लिए यादगार पल तब बना, जब श्री साहित्य कुंज का सातवां वार्षिक सम्मान समारोह धूमधाम से मेकन के इस्पात क्लब में आयोजित हुआ। “कलमकार कुंभ” के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, सम्मान और सृजन का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व वाणी अभियान, जबलपुर के सभाध्यक्ष और महादेवी वर्मा के भतीजे आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ रहे। उन्होंने अपने संबोधन में साहित्य की भूमिका पर गहराई से बात करते हुए कहा कि साहित्य सिर्फ समाज का दर्पण नहीं, बल्कि भविष्य को दिशा देने वाला माध्यम भी है। उन्होंने रचनाकारों से अपील की कि वे अपने लेखन की गुणवत्ता और उपयोगिता पर ध्यान देते हुए निरंतर सृजन करते रहें। विशिष्ट अतिथि डॉ. जे.बी. पाण्डेय ने कहा कि साहित्य का काम लोगों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि-
झड गई पूंच्छ, नख दंत झडे
पशुता का झडना बाकी है।
बाहर बाहर तन संवर चुका,
मन अभी संवरना बाकी है।
तन को सुधारना यदि सभ्यता है तो मन को सुधारना साहित्य एवं संस्कृति है।
इस मौके पर डॉ. मंजू ठाकुर ने श्री साहित्य कुंज की साहित्यिक गतिविधियों की सराहना की, वहीं छंद माल्य की संयोजिका डॉ. प्रतिभा प्रसाद ‘कुमकुम’ ने संस्था की उपलब्धियों पर गर्व जताया। कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपने विचार साझा किए। इनमें डॉ. निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव, डॉ. वासुदेव प्रसाद, डॉ. कमल कुमार बोस, डॉ. प्रमोद कुमार झा, डॉ. ओम प्रकाश, तुषार कांत सक्सेना, डॉ. राकेश रमण, डॉ. आशुतोष प्रसाद, नरेश बंका, चंद्रिका ठाकुर ‘देशदीप’, रेणु झा, रेणु मिश्रा, डॉ. उर्मिला सिन्हा, डॉ. पद्मा प्रसाद, डॉ. आशा गुप्ता, डॉ. अनिता राय, डॉ. निर्मला कर्ण, डॉ. रूपामाला, अधिवक्ता डॉ. ललन कुमार सिन्हा, असित कुमार, नेहाल हुसैन ‘सरायवी’, डॉ. जय गोविन्द ‘मन्नु’ और जितेंद्र कुमार शामिल रहे।

इस भव्य आयोजन की खास बात रही-मंचस्थ अतिथियों का सम्मान, रचनाकारों का सम्मान और एक साथ सात नई पुस्तकों का लोकार्पण। मंच से जिन कृतियों का विमोचन हुआ, उनमें डॉ. मनीषा सहाय सुमन की संपादित वार्षिक पत्रिका “साहित्य संवाहक” (विशेषांक अक्षर पुरुष), “नारी मन की कविताएं” (साझा संग्रह), “बूंद-बूंद जिंदगी” (लघुकथा संग्रह), “एक अनोखा प्रेम” (उपन्यास), “खुशियों की दस्तक” (कहानी संग्रह), पुष्पा पाण्डेय की तीन पुस्तकें-“आखिरी पन्ना”, “बिखरे मोती” और “हमराज बनी परछाइयां”, तथा मधुमिता साहा की “अहसासों के मोती” शामिल रहीं। सभी पुस्तकों पर अतिथियों ने संक्षिप्त समीक्षा भी प्रस्तुत की।

सम्मान समारोह में तुषार क्रांति सक्सेना को “सुरेंद्र नाथ सक्सेना साहित्य स्मृति सम्मान 2026” दिया गया। वहीं रचनाकार सम्मान 2026 से प्रतिमा त्रिपाठी, पुष्पा पाण्डेय, डॉ. रजनी रंजन, मधुमिता साहा, बिंदु प्रसाद ‘रिद्धिमा’, डॉ. रूपामाला, डॉ. निर्मला कर्ण और डॉ. उर्मिला सिन्हा को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, रीना सिन्हा ‘सलोनी’ को “वाग्देवी सम्मान”, रिम्मी वर्मा को गद्य और मधुमिता साहा को पद्य के लिए “साहित्य नव प्रभा सम्मान” मिला। डॉ. सिम्मीनाथ को “शब्द पुंज सम्मान”, डॉ. निर्मला कर्ण को “कमलदीप सम्मान” और अधिवक्ता असित कुमार को “शिष्टाचार सम्मान” से नवाजा गया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जे.बी. पाण्डेय ने सभी सम्मानित रचनाकारों को “हिंदी रत्न सम्मान 2026” और “अटल साहित्यकार सम्मान 2025” भी प्रदान किया, जिसकी खूब सराहना हुई। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कवि विजय कुमार भारती और प्रवीण परिमल के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। अंत में अतिथियों का स्वागत बिंदु प्रसाद ‘रिद्धिमा’ और सोनी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा सहाय सुमन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निर्मला कर्ण और डॉ. ओम प्रकाश ने किया। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

