देश के 7 मेडिकल कॉलेज नहीं दे रहे हैं अपने इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल कॉलेजों द्वारा इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड न देने का मामला पहुंचा, एनएमसी ने सात कॉलेजों पर कार्रवाई और नोटिस जारी किए, जवाब तलब किया गया

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सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद नेशनल मेडिकल काउंसिल ने शुरु की कार्रवाई

नई दिल्ली : देशभर के मेडिकल कॉलेजों में सात मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं जो अपने इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं। इससे संबंधित एक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। इस मामले में नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने अदालत को बताया कि देश के कुछ मेडिकल कॉलेज अभी भी अपने इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को निर्धारित स्टाइपेंड का भुगतान नहीं कर रहे हैं। आयोग ने ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एनएमसी की ओर से बताया गया कि देश में कुल 756 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें से 573 मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं है और वहां छात्रों को नियमित रूप से स्टाइपेंड दिया जा रहा है। हालांकि, 7 मेडिकल कॉलेज ऐसे पाए गए हैं जहां इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है। इस पर आयोग ने संबंधित संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि NMC ने इन सात कॉलेजों के खिलाफ जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर कॉलेज संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।