शिवपुरी-कठौतिया रेल परियोजना में अवैध मिट्टी खनन को लेकर ईडी जांच की मांग तेज

शिवपुरी-कठौतिया रेल परियोजना में कथित अवैध मिट्टी खनन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। स्थानीय लोगों ने ईडी जांच की मांग तेज करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

Razi Ahmad
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  • अवैध खनन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर बढ़ा विवाद, विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी

Shivpuri Kathautia Rail Project : टंडवा और सिमरिया क्षेत्र में चल रही शिवपुरी-कठौतिया रेल परियोजना के तहत कथित अवैध मिट्टी खनन और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग तेज कर दी है।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि रेलवे निर्माण कार्य के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी खनन किया गया तथा इससे जुड़े आर्थिक लेन-देन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। आरोप यह भी है कि कथित अवैध कमाई के बंटवारे को लेकर जुड़े पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद कई नए दावे और आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं।

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जानकारी के अनुसार, टंडवा थाना कांड संख्या 103/26 तथा चतरा सदर थाना कांड संख्या 226/26 को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ लोगों का दावा है कि यदि इन मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी या सीबीआई द्वारा की जाती है, तो कथित अवैध खनन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि परियोजना से जुड़ी कुछ कंपनियों की भूमिका पहले भी विवादों में रही है। आरोप है कि एक पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई के बाद कार्य अन्य एजेंसियों के माध्यम से जारी रखा गया, लेकिन कथित अनियमितताओं की शिकायतें समाप्त नहीं हुईं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले में जिला खनन विभाग (डीएमओ) की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि पुराने मामलों का हवाला देकर वर्तमान आरोपों से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, संबंधित कंपनियों, विभागीय अधिकारियों अथवा प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही संभव हो सकेगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है तथा जांच एजेंसियां इन आरोपों की कितनी गहराई से पड़ताल करती हैं।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।