औरतों को बहुत जल्दी जज कर लिया जाता है’: तृप्ति डिमरी ने समाज की सोच पर उठाए सवाल

Manu Shrivastava
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अभिनेत्री तृप्ति डिमरी ने महिलाओं को लेकर समाज में बनी धारणाओं और उन्हें जल्दी जज किए जाने की प्रवृत्ति पर खुलकर बात की। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का उदाहरण देते हुए बताया कि अक्सर महिलाओं, खासकर मांओं को एक तय दायरे में बांध दिया जाता है। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे बिना किसी शिकायत के अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाएं। तृप्ति ने कहा कि बचपन में यदि उनकी मां किसी कारणवश खाना नहीं बना पाती थीं या रोजमर्रा का कोई काम नहीं कर पाती थीं, तो परिवार के लोग शिकायत करने लगते थे। हालांकि, बड़े होने के बाद जब उन्होंने अपनी मां के संघर्षों को समझा, तो उन्हें एहसास हुआ कि परिवार अक्सर महिलाओं के मानवीय पहलू को नजरअंदाज कर देता है। उन्होंने स्वीकार किया कि अपनी मां के अनुभवों को सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।

 

समाज की सोच बदलने की जरूरत

 

तृप्ति डिमरी ने अपने बचपन का एक और अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी सोसायटी में रहने वाली दो सिंगल महिलाओं को सिर्फ उनके फैशनेबल होने के कारण लोग गलत नजरिए से देखते थे। बच्चों को भी उनके करीब जाने से रोका जाता था और उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता था। अभिनेत्री का मानना है कि ऐसी सोच समाज में गहराई से जड़ें जमा चुकी है और इसे बदलने की जरूरत है। उनके अनुसार, महिलाओं को पूर्वाग्रहों के आधार पर आंकने के बजाय उनके संघर्षों और व्यक्तित्व को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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