द्रमुक ने मुख्यमंत्री विजय पर करूर में दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया

करूर भगदड़ को लेकर तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। द्रमुक ने मुख्यमंत्री विजय पर दुष्प्रचार का आरोप लगाया, जबकि विजय ने सरकार पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया।

Razi Ahmad
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Tamil Nadu Politics : द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर करूर में झूठ बोलने और जनता को “मूर्ख” समझने का आरोप लगाते हुए उन पर तीखा हमला किया।

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय शुक्रवार को पहली बार करूर पहुंचे। 27 सितंबर 2025 को प्रचार अभियान के दौरान यहां हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। एलंगोवन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विजय के देर से पहुंचने के कारण यह दुखद घटना हुई थी। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी और भोजन व पानी की कमी के कारण कई लोग बेहोश हो गए थे।

एलंगोवन ने कहा कि विजय को दोपहर 12 बजे भाषण देना था, लेकिन वह शाम 7:30 बजे पहुंचे थे, इस वजह से लोगों को कई घंटे तक तेज धूप में इंतजार करना पड़ा। द्रमुक के नेता ने रास्ते में भीड़ के कारण देरी होने की विजय की दलील को “बड़ा झूठ” बताया।

एलंगोवन ने कहा, “सामान्य समझ वाला कोई भी व्यक्ति जानता है कि अगर लोगों को तेज गर्मी में बिना भोजन और पानी के छोड़ दिया जाए तो वे बेहोश हो जाएंगे। तत्कालीन द्रमुक सरकार ने करूर अस्पताल में भर्ती 100 लोगों में से 60 लोगों की जान दूसरे अस्पतालों से डॉक्टर बुलाकर बचाई। लेकिन 41 लोगों को नहीं बचाया जा सका, क्योंकि उनके शरीर तेज गर्मी और थकावट सहन नहीं कर सके। यह उस स्थिति का स्वाभाविक परिणाम था।”

द्रमुक नेता ने विजय के समर्थकों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ सिर्फ विजय की एक झलक देखने में लगी थी।
उन्होंने कहा कि बेहोश लोगों की मदद करने या उन्हें पानी देने के बजाय कुछ समर्थक उनके ऊपर से होकर निकल गए। एलंगोवन कहा कि पर्याप्त पुलिस सुरक्षा का मतलब यह नहीं है कि इतनी बड़ी भीड़ में हर व्यक्ति के साथ एक पुलिसकर्मी लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि यह घटना दंगों की नहीं, बल्कि परिस्थितियों के कारण हुई थी।

मुख्यमंत्री विजय द्वारा द्रमुक सरकार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर एलंगोवन ने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के अंदरूनी विवादों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विजय की पार्टी के एक वकील ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और महासचिव ने पार्टी के वकीलों की नियुक्ति के लिए एक लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक की रिश्वत ली।

एलंगोवन ने कहा, “ये आरोप हमने नहीं लगाए। उनकी अपनी पार्टी के एक वकील अदालत गए हैं। अगर विजय से इस बारे में पूछा जाए, तो शायद उनके पास इसका जवाब होगा।” करूर भगदड़ से प्रभावित 32 परिवारों को नियुक्ति पत्र देने के बारे में पूछे जाने पर द्रमुक नेता ने इसे करूर उपचुनाव को ध्यान में रखकर किया गया दिखावा बताया।

उन्होंने कहा कि अदालतें पहले भी ऐसे हादसों में सरकारी नौकरी देने के खिलाफ फैसला दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जिस परिवार का कमाने वाला सदस्य मर गया हो, उसकी मदद करना समझ में आता है, लेकिन यह कदम सिर्फ मतदाताओं को खुश करने के लिए उठाया गया है, ताकि आगामी उपचुनाव में वे विजय की पार्टी के खिलाफ नाराजगी न दिखाएं।

एलंगोवन ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज किया कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक “गुप्त सहयोगी” की तरह काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक वर्ष 1972 से, यानी पिछले 54 वर्षों से तमिलनाडु में एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

मुख्यमंत्री बनने के बाद करूर की अपनी पहली यात्रा के दौरान विजय ने भगदड़ की घटना से “राजनीतिक फायदा” उठाने की कोशिश करने के लिए द्रमुक पर निशाना साधा। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि द्रमुक ने उन्हें करूर का दौरा करने से रोका था।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।