बिरसा की विरासत को चट कर रहे दीमक, अनदेखी की भेंट चढ़ रही कलाकृतियां

रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय बदहाली का शिकार है। 35 करोड़ रुपये से तैयार धरोहर में रखरखाव की कमी से खिड़की-दरवाजे, लाइटें और संरचनाएं खराब हो रही हैं।

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35 करोड़ खर्च कर जुडको ने कराया है जेल का जीर्णोद्धार

गिर रहा परिसर में बनाए गए खपड़ैल वाले घर का स्ट्रक्चर

बिखरी पड़ी है लाइट, कोई नहीं है देखने वाला

VIVEK SHARMA

रांची: झारखंड के गौरव और ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा की याद में बनाया गया ऐतिहासिक संग्रहालय आज अनदेखी के कारण बदहाली का शिकार हो रहा है। अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल की तर्ज पर जुडको द्वारा करीब 35 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर इस पुरानी जेल का जीर्णोद्धार किया गया था। लेकिन रखरखाव के अभाव में अब यह भव्य धरोहर समय से पहले ही जर्जर होने लगी है। अगले महीने इस जेल परिसर में ही विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर हमारे माननीय बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने वाला कोई नहीं है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संग्रहालय का उद्घाटन किया था।

दीमकों की भेंट चढ़ रहे खिड़की दरवाजे

संग्रहालय के भीतर भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और उनके संघर्षों को जीवंत करने के लिए कई बेशकीमती कलाकृतियां और ढांचे तैयार किए गए थे। लेकिन वर्तमान में उचित देखरेख न होने के कारण इन खिड़की दरवाजे को दीमक चट कर रहे हैं। वहीं दीवारें अब झड़ रही है। कई जगहों पर तो खिड़कियां और दरवाजे भी गायब हो गए हैं। परिसर में बनाए गए पारंपरिक खपड़ैल घरों का स्ट्रक्चर अब ढहने की कगार पर पहुंच गया है। आधी छत भी ढह गई है।

बिखरी पड़ी हैं लाइटें, सुध लेने वाला कोई नहीं

जेल परिसर को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने और राज्य के वीर शहीदों की गाथा दिखाने के लिए लाखों रुपये की आधुनिक लाइटें और लेजर शो की व्यवस्था की गई थी। आज वे कीमती लाइटें परिसर में जगह-जगह लावारिस और बिखरी पड़ी हैं। इस धरोहर की सुरक्षा व रखरखाव करने वाला वहां कोई नजर नहीं आता, जिससे सरकारी पैसे की भारी बर्बादी साफ देखी जा सकती है।

क्या था इस भव्य संग्रहालय का उद्देश्य?

इस संग्रहालय को इस तरह डिजाइन किया गया था कि नई पीढ़ी झारखंड के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम से रूबरू हो सके। जेल के पिछले हिस्से में राज्य के 10 अमर शहीदों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं, जिन्हें लेजर लाइट और साउंड शो के माध्यम से जीवंत किया जाना था। मुख्य द्वार पर अंग्रेजों के आगमन से लेकर रांची के इतिहास और धरती आबा के उलगुलान (संघर्ष) की पूरी दास्तां प्रदर्शित की गई है। परिसर में मूर्तिकार राम सुतार द्वारा बनाई गई भगवान बिरसा मुंडा की 30 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा और उस कक्ष को भी संरक्षित किया गया है जहां वे कैद थे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।