
नई दिल्ली : देश के 100 प्रमुख लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त बयान में जंतर-मंतर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में किए जा रहे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की ख़बरों पर गहरी चिंता और नाराज़गी जताई गई है।
हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है, “एक संवैधानिक लोकतंत्र में युवाओं की जायज़ मांगों का समाधान संवाद और न्याय के माध्यम से होना चाहिए, न कि हिंसा या डराने-धमकाने के ज़रिए।” लेखकों और कलाकारों ने केंद्र और राज्य सरकारों से पेपर लीक और उससे जुड़ी अनियमितताओं के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल सख़्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, छात्रों के साथ ईमानदार संवाद शुरू करने और उनके खिलाफ हिंसा और बल प्रयोग की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की गई है। उन्होंने देशभर के लेखकों, कलाकारों और चिंतकों से भी छात्रों की मांगों के समर्थन में आगे आने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने की अपील की है। इस संयुक्त बयान पर के सच्चिदानंदन, अशोक वाजपेयी, दामोदर मावजो, महेश एलकुंचवार, बानू मुश्ताक़, मल्लिका साराभाई, गीतांजलि श्री, गीता हरिहरन, अनामिका, कुमार अंबुज समेत देशभर के कुल 100 लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

