

चंपावत: रक्षाबंधन के पर्व पर शुक्रवार को उत्तराखंड के चंपावत जिले में देवीधुरा स्थित शक्तिपीठ मां वाराही धाम के प्रागंण में फलों और फूलों से पारंपरिक बग्वाल (भक्तों के गुटों के बीच युद्ध) खेला गया जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।





अपराह्न एक बजकर 48 मिनट पर चारों खाम (गुटों) के बीच शुरू हुई बग्वाल आठ मिनट तक चली और एक बजकर 55 मिनट पर यह समाप्त हो हुयी।
मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद चारों खाम-वालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला) के बग्वालियों का मैदान में प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच फलों और फूलों की बरसात हुई।
श्रद्धालुओं के मुताबिक शौर्य और साहस की प्रतीक इस बग्वाल के जरिए मां वाराही को प्रसन्न करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। मान्यता है कि इस क्षेत्र में आसुरी शक्तियां लगातार मानव वध कर महाविनाश कर रही थी जिसे रोकने के लिए चारों खामों ने मां वाराही की शरण ली और उनके धाम देवीधुरा के प्रांगण में पत्थर युद्ध के जरिए एक मानव जितना रक्त अर्पित कर मां को प्रसन्न किया।
जानकारों के मुताबिक यह परंपरा प्राचीन समय से अनवरत जारी है लेकिन समय के साथ अब इसमें बदलाव कर पत्थरों की जगह फल और फूलों का प्रयोग किया जाता है।
पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री ने मां वाराही देवी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
उन्होंने कहा, “वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। अनुशासन और भाईचारे की यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा गले मिलते हैं।”
धामी ने देवीधुरा के बग्वाल मेले को प्रदेश की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया और ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस संबंध में उन्होंने ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ का जिक्र किया जिसके तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की घोषणा भी की। इस मौके पर मेले में मौजूद बालिकाओं एवं महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी भी बांधी।
