

चेन्नई : कांग्रेस ने तमिलनाडु सरकार के एक विभागीय नीति पत्र में जवाहरलाल नेहरू समेत प्रमुख नेताओं के नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपनी पूर्व सहयोगी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की आलोचना पर पलटवार करते हुए रविवार को द्रमुक पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने द्रमुक शासन के दौरान हुई ऐसी ही घटनाओं का हवाला दिया। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष आर. आर. मनोहरन ने दावा किया कि द्रमुक के पूर्ववर्ती शासनकाल में पेश किए गए आधिकारिक नीति पत्रों में नेहरू और बी. आर. आंबेडकर के नामों का कहीं उल्लेख नहीं था।





इससे पहले, द्रमुक के पूर्व विधायक और पार्टी के विधि प्रकोष्ठ के संयुक्त सचिव ई. परंथमन ने पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के नीति पत्र में ई.वी. पेरियार, आंबेडकर और नेहरू जैसे प्रमुख नेताओं के नाम नहीं होने को लेकर शनिवार को तमिलनाडु सरकार की आलोचना की थी। परंथमन ने कांग्रेस की ‘‘चुप्पी’’ पर सवाल उठाते हुए कहा था कि संविधान का पहला संशोधन पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेहरू का नाम तक नीति पत्र से हटा दिया गया। मनोहरन ने एक बयान में कहा, ‘‘द्रमुक जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रही है और हताशा में वह और उसके प्रवक्ता बेतुकी बातें कर रहे हैं। उन्हें सबसे पहले अपने पिछले नीतिगत दस्तावेजों को खोलकर देखना चाहिए।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कड़वा सच यह है कि 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में द्रमुक के पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान तत्कालीन मंत्री एस. राजाकन्नप्पन द्वारा पेश किए गए आधिकारिक नीति पत्रों में नेहरू या आंबेडकर के नाम का कहीं उल्लेख नहीं था।’’ मनोहरन ने परंथमन से सवाल किया कि क्या वह पिछली विधानसभा (2021-26) के सदस्य नहीं थे। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘जब आपके मंत्री नीति पत्र पढ़ रहे थे, तब क्या आप सदन में सो रहे थे? या फिर सत्ता में रहते हुए आपने वर्षों तक जानबूझकर नीतिगत दस्तावेजों से आंबेडकर और नेहरू के नामों की अनदेखी की और उन्हें बाहर रखा? तब सामाजिक न्याय के प्रति आपकी प्रतिबद्धता कहां थी?’’
कांग्रेस तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा है।
