नयी दिल्ली : दूरसंचार उद्योग संगठन सीओएआई और ब्रिटिश उच्चायोग ने कृत्रिम मेधा (एआई), डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल विश्वास और जिम्मेदार प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने के लिए सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा ब्रिटिश उच्चायोग के सहयोग से आयोजित ‘सीओ.एआई 2026’ कार्यक्रम के दौरान हुआ। कार्यक्रम में सरकार, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई), दूरसंचार कंपनियों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और डिजिटल पारिस्थितिकी से जुड़े अन्य हितधारकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम में बुद्धिमान और स्वायत्त नेटवर्क, सुरक्षा एवं डिजिटल मजबूती तथा नागरिकों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए एआई के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। इस दौरान डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने, उपभोक्ता संरक्षण मजबूत करने और नेटवर्क दक्षता बढ़ाने में एआई की भूमिका पर भी जोर दिया गया। इस अवसर पर ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि एआई नए अवसर पैदा करता है, लेकिन इसके लिए उचित संचालन व्यवस्था की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि नियमन को निवेश, प्रतिस्पर्धा, नवाचार, गुणवत्ता और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना होगा।
भारत में ब्रिटेन के कार्यवाहक उच्चायुक्त बेन मेलर ने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि नवाचार के साथ सुरक्षा, जवाबदेही और मजबूती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अपराधी घोटालों को अंजाम देने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन एआई संस्थानों को नुकसान के रुझानों की शुरुआती पहचान करने में भी मदद कर सकता है। सीओएआई के महानिदेशक एसपी कोचर ने कहा कि भारत में कनेक्टिविटी के अगले चरण को बुद्धिमान, सुरक्षित, मजबूत और नागरिक-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूरसंचार नेटवर्क तेजी से एआई-सक्षम प्रणालियों में बदलेंगे, जो प्रदर्शन, सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता बेहतर बनाने के साथ उपभोक्ताओं को डिजिटल जोखिमों से बचाने में भी मदद करेंगे।

