नयी दिल्ली : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुनियादी ढांचा विकास के संबंध में सोमवार को कहा कि कानून के शासन से अभिप्राय केवल गलत को ठीक करना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण बनाना भी है जहां चीजें सही तरीके से हों। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ‘‘बुनियादी ढांचे के स्वभाविक रूप से अप्रत्याशित परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील होने’’ की बात कही। उन्होंने अवसंरचना विकास में पूर्वव्यापी न्याय से निवारक न्याय की ओर बढ़ने की अपील की। यहां एफआईडीसी वैश्विक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित करते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि सफलता का असली पैमाना सिर्फ यह नहीं है कि विवाद कितनी जल्दी सुलझाए जाते हैं, बल्कि यह है कि परियोजनाओं को कितनी अच्छी तरह से डिजाइन किया गया है ताकि विवाद कम से कम हों।
उन्होंने कहा, ‘‘कानून के शासन का मतलब सिर्फ गलतियों को सुधारना ही नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण बनाना भी है जिसमें सबकुछ सही तरीके से हो सके।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसलिए, हमारी अवसंरचना को पूर्वव्यापी न्याय से हटकर निवारक न्याय की ओर बढ़ने की जरूरत है। यानी, परियोजना में रुकावट आने के बाद सवाल उठाने के बजाय, अनुबंध और संस्थागत ढांचे को इस तरह से तैयार किया जाए कि बातचीत और विवाद से बचने के तरीकों के जरिए असहमति की पहचान करके उन्हें विवाद का रूप लेने से पहले ही सुलझाया जा सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार, विवाद सुलझाने वाली प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं है कि उसने बहुत सारे विवाद सुलझाए हैं, बल्कि यह है कि जिस परियोजना के लिए वह थी, उसे उसका इस्तेमाल करने की बहुत कम जरूरत पड़ी।’’
प्रधान न्यायाधीश के तौर पर अदालतों में ‘‘गहरा विश्वास’’ जताते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि कानून प्रणाली को अपनी सफलता सिर्फ इस आधार पर नहीं आंकनी चाहिए कि वह विवाद पैदा होने के बाद उसे कितने प्रभावी तरीके से सुलझाती है, बल्कि उसे यह भी देखना चाहिए कि किसी परियोजना से जुड़ी संस्थाएं उन विवादों को शुरू में ही पैदा होने से रोकने में कितनी असरदार हैं।’’ उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया चलने के दौरान किसी पुल का निर्माण नहीं रोका जा सकता, और न ही किसी राजमार्ग के मामले में अपील की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अवसंरचना विकास का सीधा असर लाखों लोगों की जिंदगी पर पड़ता है; सड़कें, पुल, जलापूर्ति और अन्य सार्वजनिक संपत्ति नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को बेहतर बनाती हैं।

