समानता, सेवा और लोककल्याण के युगपुरुष थे महाराजा अग्रसेन: संजय सर्राफ

महाराजा अग्रसेन जयंती पर जानिए ‘एक ईंट और एक रुपया’ की परंपरा, अग्रोहा की विरासत और समाजसेवा, समानता, सहयोग व आत्मनिर्भरता का उनका प्रेरणादायी संदेश।

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रांची : झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाराजा अग्रसेन जयंती अग्रवाल समाज के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा,अर्थात शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मनाया जाता है। इस वर्ष महाराजा अग्रसेन की जयंती रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन महाराजा अग्रसेन के जन्मोत्सव के साथ-साथ उनके आदर्शों, सिद्धांतों और लोक कल्याणकारी विचारों को स्मरण करने का अवसर है।महाराजा अग्रसेन भारतीय परंपरा में एक आदर्श राजा, समाज-सुधारक, दानवीर और प्रजावत्सल शासक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनके जीवन से जुड़ी अनेक कथाएं एवं परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं। मान्यता है कि उन्होंने अग्रोहा को अपनी राजधानी बनाकर ऐसी शासन व्यवस्था विकसित की, जिसमें प्रजा के सुख, सम्मान, स्वावलंबन और समानता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।

अग्रोहा को आज भी अग्रवाल समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल के रूप में देखा जाता है।महाराजा अग्रसेन के आदर्शों में सबसे अधिक चर्चित ‘एक ईंट और एक रुपया’ की परंपरा है। मान्यता के अनुसार अग्रोहा में जब कोई नया परिवार आकर बसता था, तो नगर का प्रत्येक परिवार उसे एक ईंट और एक रुपया देता था। ईंट से वह अपना घर बनाता और रुपये से व्यवसाय प्रारंभ करता। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य नवागंतुक को सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर बनाना था। यह विचार आज भी सामाजिक सहयोग, आर्थिक स्वावलंबन और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण माना जाता है।महाराजा अग्रसेन की शासन व्यवस्था में सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना प्रमुख थी।

उनसे जुड़ी परंपराओं में अग्रोहा को 18 जनपदों में विभाजित करने और 18 गोत्रों की परंपरा विकसित होने का उल्लेख मिलता है। यही कारण है कि अग्रवाल समाज में महाराजा अग्रसेन को सामाजिक संगठन और एकता का आधार स्तंभ माना जाता है।उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने समृद्धि को केवल व्यक्तिगत धन-संचय का साधन नहीं माना, बल्कि उसे समाज के कल्याण से जोड़ा। सेवा, सहयोग, परिश्रम, व्यापार में नैतिकता, जरूरतमंदों की सहायता, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता उनके आदर्शों के मूल तत्व माने जाते हैं। वर्तमान समय में जब समाज आर्थिक विषमता, बेरोजगारी और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब महाराजा अग्रसेन का सहयोग से स्वावलंबन का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।

अग्रसेन जयंती पर देशभर में शोभायात्रा, पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार गोष्ठियां, चिकित्सा शिविर, रक्तदान, जरूरतमंदों को सहायता तथा समाजसेवा के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं, बल्कि महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना है।आज आवश्यकता है कि हम महाराजा अग्रसेन के जीवन-संदेश को केवल उत्सव और समारोह तक सीमित न रखें। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए समाज में सहयोग, सद्भाव, समानता, सेवा और स्वावलंबन की भावना को मजबूत करें। यही महाराजा अग्रसेन के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और उनकी जयंती मनाने की सार्थकता होगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।