
एजेंसियों की अवधि समाप्त होने के बाद आई समस्या
जानकारी के अनुसार, नगर विकास एवं आवास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सुडा) ने 21 अगस्त को इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी किया था। रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल के तहत काम करने वाली तीन एजेंसियों की विस्तारित अवधि 31 जुलाई को समाप्त हो गई। इसके बाद से वाटर बिल जमा करने की व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में करीब 17 लाख 30 हजार रुपये के वाटर बिल जमा किए गए थे। हालांकि, एजेंसियों की अवधि समाप्त होने और राजस्व वसूली का काम नगर निकाय स्तर से कराने के फैसले के बाद बिल संग्रहण की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई है।
रोजगार और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे आउटसोर्स कर्मचारी
इस बदलाव का असर राजस्व वसूली के काम में लगे आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी पड़ा है। वर्षों से इस काम में जुड़े कर्मचारी अपने रोजगार और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस संबंध में कर्मचारी कई बार नगर आयुक्त से मुलाकात कर अपनी मांग रख चुके हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि एजेंसियां बदलती रहीं, लेकिन वे लगातार राजस्व वसूली का काम करते रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार से वैकल्पिक व्यवस्था होने तक उन्हें काम पर बनाए रखने की मांग की है।
उपभोक्ताओं को व्यवस्था बहाल होने का इंतजार
वाटर बिल जमा करने की प्रक्रिया बाधित होने से उपभोक्ताओं के सामने बकाया भुगतान और नए कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। अब उपभोक्ताओं को बिल संग्रहण की व्यवस्था दोबारा शुरू होने का इंतजार है। वहीं, कर्मचारियों की ओर से भी रोजगार की सुरक्षा के लिए समाधान की मांग की जा रही है।


