कोरोना से लड़ाई जीतने के बाद भी वीर चक्र से सम्मानित मेजर पंजाब सिंह ने तोड़ा दम

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में हीरो रहे वीर चक्र हासिल करने वाले मेजर पंजाब सिंह का सोमवार देर रात 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

वह कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर में भर्ती थे और कोविड से जंग जीतकर ठीक हो गए थे लेकिन कुछ चिकित्सीय जटिलताओं के कारण उनकी सांसें थम गईं।

पांच दिन पूर्व ही कोविड से उनके बेटे का निधन होने से परिवार पर दुखों का दोहरा पहाड़ टूट पड़ा है।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर निवासी मेजर पंजाब सिंह 1986-1990 के दौरान सिख बटालियन की कमान संभाली थी।

पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में वह पुंछ की लड़ाई के नायक थे। उन्होंने युद्ध के दौरान ऑपरेशन ‘कैक्टस लिली’ में हिस्सा लेकर अपनी सिख बटालियन के लिए ‘डिफेंस ऑफ पुंछ’ युद्ध सम्मान अर्जित किया।

उन्हें बाद में 24 दिसम्बर, 1971 को वीर चक्र से भी सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें 1972 के स्वतंत्रता दिवस पर दिया गया था। परिवार के लिए दोहरे दुख की बात इसलिए है कि महज पांच दिन पहले उनके बड़े बेटे अनिल कुमार ने 21 मई को कोविड के कारण दम तोड़ दिया था।

पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मेजर पंजाब सिंह पश्चिमी सेक्टर में तैनात एक कंपनी की कमान संभाल रहे थे।

3 दिसम्बर, 1971 को उनकी कंपनी पर तोपखाने और मोर्टार से फायर करके दुश्मन की दो कंपनियों ने हमला कर दिया था।

मेजर पंजाब सिंह अपनी सुरक्षा के लिए खाई की आड़ में चले गए और मोर्चा संभाल लिया।

उन्होंने सुनिश्चित किया कि उनकी कमान की ओर से चलाये जा रहे सभी हथियार दुश्मन को प्रभावी ढंग से लगें।

उनके प्रेरक नेतृत्व, अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय से शत्रु के आक्रमण को परास्त कर दिया गया। इतना ही नहीं दुश्मन के तीन और प्रयासों को अगले दो दिनों में इसी तरह विफल कर दिया गया।

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