जब अर्जुन रामपाल ने मेहनत से बदली हार की कहानी

Manu Shrivastava
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बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल अक्सर अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हैं। उनका मानना है कि जीवन के कई महत्वपूर्ण पाठ उन्हें अपनी मां से मिले, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया। अर्जुन बताते हैं कि बचपन में उन्हें स्कूल जाना बिल्कुल पसंद नहीं था। ऐसे में उनकी मां ने एक अनोखा फैसला लिया और उसी स्कूल में शिक्षिका बन गईं, ताकि वह उनके साथ स्कूल जा सकें और पढ़ाई से दूर न भागें।

एक हार ने सिखाया मेहनत का असली मतलब

अर्जुन बचपन से ही दौड़ में बेहद तेज थे और लगभग हर रेस जीतते थे। लेकिन एक साल उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार से निराश अर्जुन को उनकी मां ने समझाया कि सामने वाले ने जीतने के लिए लगातार अभ्यास किया होगा, जबकि उन्होंने खुद तैयारी नहीं की थी।

मां बनीं कोच, बेटे ने जीती हर रेस

अगले ही दिन से अर्जुन की ट्रेनिंग शुरू हो गई। उनकी मां सुबह जल्दी उठकर उन्हें दौड़ने के लिए प्रेरित करती थीं। वह स्कूटर पर पीछे-पीछे चलतीं और अर्जुन दौड़ लगाते। यह सिलसिला कई महीनों तक जारी रहा। मेहनत का नतीजा यह हुआ कि अगली प्रतियोगिताओं में कोई भी उन्हें हरा नहीं सका।

लगातार प्रयास ही सफलता की कुंजी

आठवीं कक्षा में अर्जुन को उनकी लंबाई और वजन के कारण 12वीं के छात्रों के साथ रेस में शामिल किया गया, लेकिन उन्होंने वहां भी जीत हासिल की। इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि निरंतर अभ्यास और समर्पण किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की सबसे बड़ी ताकत है।

 

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