भारत और चीन की सेना एक दूसरे के आमने सामने, ​एक ही जोश के साथ सभी रैंक रहें तैनात: सेना प्रमुख

नई दिल्ली: उत्तराखंड की यात्रा के दूसरे दिन गुरुवार को भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने चुनिंदा प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति और परिचालन संबंधी तैयारियों की​​ समीक्षा की। नरवणे ने आज कुमांऊ रेंज के पिथौरागढ़ का दौरा किया और सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने जवानों से मुलाकात की और सभी रैंकों को एक ही जोश और उत्साह के साथ तैनात रहने के लिए प्रोत्साहित किया। दौरे के पहले दिन जनरल नरवणे ने सीमांत चौकियों का हवाई निरीक्षण किया था।
उत्तराखंड के लिपुलेख बॉर्डर पर भारत, नेपाल और चीन की सीमाएं मिलती हैं। चीनी आर्मी पीएलए ने यहीं पर करीब दो हजार जवानों की तैनाती करने के साथ ही अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। पिथौरागढ़ के कालापानी और लिपुलेख को लेकर ही भारत और नेपाल के संबंधों में भी तल्खी आई है। भारत की चीन के साथ लगने वाली 345 किलोमीटर लंबी सीमा चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है। पूर्व में चीन कई बार चमोली जिले के बाड़ाहोती में कथित तौर पर घुसपैठ कर चुका है। इससे अलग पिछले छह महीने से पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर भारत और चीन की सेना एक दूसरे के आमने सामने हैं, ऐसे में जनरल नरवणे के इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को उत्तराखंड पहुंचे। उन्होंने चमोली जिले के माणा पास से लगी सीमांत चौकियों का हवाई निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने नीती घाटी में नीती पास, रिमखिम में भारतीय सीमा चौकियों का हवाई निरीक्षण भी किया। जनरल नरवणे ने इसके बाद गढ़वाल रेंज के जोशीमठ का दौरा करके सैन्य अधिकारियों व जवानों से मुलाकात की। उन्होंने जोशीमठ में सीमा की स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही सेना की सुरक्षा स्थितियों और ऑपरेशनल तैयारियों का जायजा लिया।जोशीमठ में रात्रि विश्राम के बाद आज नरवणे ने कुमांऊ रेंज के पिथौरागढ़ का दौरा करके सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।

सेना प्रमुख मनोज नरवणे चीन, नेपाल ट्राइजंक्शन भी पहुंचे और जवानों से मुलाकात करके सभी रैंकों को एक ही जोश और उत्साह के साथ तैनात रहने के लिए प्रोत्साहित किया। नैनीताल के लिए रवाना होने से पहले जनरल नरवणे ने सुबह सीमा चौकियों का हवाई सर्वेक्षण किया। सेना प्रमुख के गुरुवार को नैनीताल में ही रात्रि विश्राम करने की संभावना है। शुक्रवार को वह उत्तर प्रदेश के बरेली के लिए रवाना होंगे। हांलांकि अधिकारियों ने सेना प्रमुख के दौरे के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया लेकिन माना जा रहा है कि वह उत्तरी क्षेत्र की स्थिति का स्वयं आकलन करने तथा सैन्यकर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए गए हैं।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन के बीच बढ़ते तनाव के बाद उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में सेना पूरी तरह मुस्तैद है। सेना और आईटीबीपी के साथ-साथ वायुसेना भी अलर्ट पर है। सुरक्षा की तैयारियों के बीच वायु सेना उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अपना एडवांस लैंडिंग ग्राउंड भी मजबूत करने जा रही है।

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