अभिनेत्री अविका गौर ने ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ से अपने एलिमिनेशन के बाद पहली बार अपने अनुभव और भावनाओं के बारे में खुलकर बात की है। शो से इतनी जल्दी बाहर होना उनके लिए आसान नहीं रहा। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट शेयर कर बताया कि इस सफर ने उनके सोचने और खुद को देखने के नजरिए पर काफी असर डाला।
घर बैठकर आता है बार-बार एक ख्याल
अविका ने बताया कि एलिमिनेशन के बाद जब वह घर बैठकर शो देखती हैं, तो उनके मन में बार-बार यही विचार आता है कि अगर वह उस वक्त वहां होतीं, तो शायद स्टंट को और बेहतर तरीके से कर पातीं। उन्हें लगता है कि वह हार नहीं मानतीं और ज्यादा कोशिश करतीं।
खुद को मानने लगती हैं ‘सोफा एक्सपर्ट’
अविका ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शो को आराम से सोफे पर बैठकर देखते हुए वह खुद को ‘सोफा एक्सपर्ट’ समझने लगती हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि अगर वह उस परिस्थिति में होतीं, तो बेहतर फैसला ले सकती थीं और स्टंट में शानदार प्रदर्शन कर सकती थीं।
असली डर और दबाव का नहीं होता एहसास
हालांकि, अभिनेत्री को यह भी एहसास है कि टीवी पर बैठकर किसी स्टंट को देखना और उसे खुद करना बिल्कुल अलग अनुभव है। घर पर उन्हें उस समय का वास्तविक दबाव, डर और एड्रेनालिन महसूस नहीं होता। ऐसे में बाहर बैठकर किसी स्थिति में खुद को हीरो समझना काफी आसान होता है।
दिमाग बार-बार बनाता है दूसरी कहानी
अविका ने कहा कि जब कोई चीज हमारे लिए बहुत मायने रखती है, तो हम उसे बार-बार दिमाग में दोहराते हैं। हम अलग-अलग फैसलों की कल्पना करते हैं और कहानी का ऐसा वर्जन बना लेते हैं, जो वास्तव में कभी हुआ ही नहीं। शायद इसी वजह से उनके लिए जल्दी एलिमिनेट होने की बात को पूरी तरह स्वीकार करना मुश्किल रहा।
अब भी लगता है बहुत कुछ करना बाकी था
अभिनेत्री ने बेहद ईमानदारी से कहा कि उनके अंदर कहीं न कहीं अभी भी वह लड़की मौजूद है, जिसे लगता है कि उसके पास शो में देने के लिए बहुत कुछ था। यही भावना उनके एलिमिनेशन को लेकर एक अधूरापन छोड़ती है।
खतरों के खिलाड़ी 15 ने सिखाया बड़ा सबक
अविका का यह अनुभव बताता है कि किसी चुनौती को बाहर से देखना और खुद उसका हिस्सा बनना दो अलग बातें हैं। ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ ने उन्हें अपने डर, फैसलों और क्षमताओं को नए नजरिए से समझने का मौका दिया।

