
कॉमनवेल्थ डे हर साल कॉमनवेल्थ देशों के बीच एकता, सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। पहले इसे “एम्पायर डे” कहा जाता था, जिसे महारानी विक्टोरिया की जयंती के रूप में मनाया जाता था। बाद में इसका नाम बदलकर कॉमनवेल्थ डे रखा गया। यह दिन लोगों को शांति, समानता और सामूहिक विकास का संदेश देता है।
कॉमनवेल्थ डे का इतिहास
1916 में लॉर्ड मीथ ने एम्पायर डे के उत्सव को सभी कॉमनवेल्थ देशों तक विस्तारित किया। 1958 में यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन ने ब्रिटिश संसद में घोषणा की कि एम्पायर डे का नाम बदलकर कॉमनवेल्थ डे किया जाएगा। इसके बाद यह दिन कॉमनवेल्थ देशों की साझा विरासत, संस्कृति और सहयोग का प्रतीक बन गया।
कॉमनवेल्थ देशों के बीच कानूनी व्यवस्था, व्यापारिक प्रक्रियाएँ और सांस्कृतिक संबंध काफी हद तक समान हैं। कॉमनवेल्थ सचिवालय के अनुसार, यह दिवस हर साल मार्च के दूसरे सोमवार को मनाया जाता है। कई देशों में इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम, भाषण और सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं।
कॉमनवेल्थ डे का महत्व
यह दिन लोगों को एकजुट होकर कठिनाइयों और नकारात्मकता का सामना करने की प्रेरणा देता है। कॉमनवेल्थ डे आपसी सम्मान, सहयोग और वैश्विक भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है।

