
नई दिल्ली : कांग्रेस ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से जुड़ी कथित अनियमितता को लेकर कहा कि स्वतंत्र जांच के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अगर प्रधान का इस्तीफा नहीं होता है तो मोदी सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच समिति दिखावा बनकर रह जाएगी।
रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, “सीबीएसई की संचालन इकाई ने दिसंबर 2024 की अपनी बैठक में यह चिंता जताई थी कि ओएसएम को लागू करने के वित्तीय प्रभाव मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी अधिक होंगे। अब एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीबीएसई के ओएसएम प्रणाली की निविदा का अनुमानित अनुबंध मूल्य, समान मात्रा के काम के बावजूद, 10 करोड़ रुपए बढ़ गया।”
उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई द्वारा जारी पहली दो निविदाओं में यह राशि 28 करोड़ रुपए थी, लेकिन ‘कोएम्प्ट’ (कांट्रैक्टर) को जारी अंतिम वर्क ऑर्डर में यह बढ़कर 38.46 करोड़ रुपए हो गई। और भी चिंताजनक बात यह है कि वास्तव में स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या और वास्तविक कीमत के आधार पर काम का मूल्य केवल 25.39 करोड़ रुपए बैठता है। यानी यह वर्क ऑर्डर में बताई गई राशि का लगभग 66 प्रतिशत ही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इसकी वजह यह है कि केवल एक व्यक्ति मंत्री प्रधान ही बता सकते हैं कि आखिर संचालन इकाई द्वारा लागत को लेकर जताई गई चिंताओं के बावजूद सीबीएसई को इतनी महंगी ओएसएम प्रणाली बढ़ी हुई दरों पर अपनाने के लिए क्यों और कैसे मजबूर किया गया ? मंत्री प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए ताकि सीबीएसई की स्वतंत्र जांच हो सके। अन्यथा मोदी सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगी।

