पाकिस्तान में खुफिया मिशन अंजाम देने वाले इस भारतीय जासूस को क्यों सता रहा मौत का डर?

पूर्व भारतीय जासूस जसविंदर राणा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से लगातार धमकियों का दावा करते हुए सरकार से अपनी और परिवार की सुरक्षा व सुरक्षित पुनर्वास की मांग की

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चंडीगढ़ : पाकिस्तान में देशहित में कई संवेदनशील खुफिया मिशनों को अंजाम दे चुके पूर्व भारतीय जासूस जसविंदर राणा ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। राणा का कहना है कि उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और आतंकवादी नेटवर्क से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अपनी जान को खतरे में बताते हुए उन्होंने सरकार से तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है।

चंडीगढ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान राणा ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के बावजूद वह साल 2005 से भारत में भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्हें और उनके परिवार को लगातार सुरक्षा संबंधी खतरे झेलने पड़ रहे हैं तथा पाकिस्तान से कथित तौर पर धमकी भरे फोन भी आ रहे हैं। राणा के अनुसार, साल 2005 में पाकिस्तान में एक अत्यंत संवेदनशील मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर भारत लौटने के बाद उनके खिलाफ खतरे और बढ़ गए। उस समय वह मुंबई में रह रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें मुंबई छोड़कर देश के विभिन्न हिस्सों में रहना पड़ा। साल 2012 से वह पंजाब के होशियारपुर में अपना जीवन बिता रहे हैं।

राणा ने बताया कि साल 2010 में मुंबई में उनके एक सहयोगी की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद उनकी चिंताएं और बढ़ गईं। उनका कहना है कि इस हत्या ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनके खिलाफ खतरे बिल्कुल वास्तविक हैं और सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। पूर्व जासूस ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा की मांग को लेकर कई बार विभिन्न सरकारी अधिकारियों और विभागों से संपर्क किया है। साल 2019 में उन्होंने पहली बार सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से अपनी सुरक्षा संबंधी चिंता रखी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार को उनकी सुरक्षा जरूरतों का आकलन कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दे चुकी है, लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण वह अभी भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने अपने दावों से संबंधित दस्तावेज और प्रमाण भी मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने सरकार से उनके परिवार की सुरक्षा का व्यापक आकलन कर पर्याप्त सुरक्षा देने और सुरक्षित पुनर्वास में सहायता करने की अपील की है। उन्हें उम्मीद है कि देश का नेतृत्व उनकी इस अपील पर गंभीरता से विचार करेगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।