
भुवनेश्वर: कांग्रेस ने रविवार को अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान देने तथा मौजूदा मंदिर ट्रस्ट को भंग करके एक नया ट्रस्ट बनाने की मांग की।
इस मुद्दे पर मोदी की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दल ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने ही राम मंदिर ट्रस्ट का ‘गठन’ किया था और इसके सभी सदस्यों की ‘नियुक्ति’ की थी।
कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की नेता मीता चक्रवर्ती ने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘नियुक्त किए गए लोगों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां भी पीएमओ ने तय की थीं। अब एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है और प्रधानमंत्री ने अभी तक इस पर एक शब्द भी नहीं कहा है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर लोगों से वोट मांगने वाली भाजपा, अयोध्या मंदिर के निर्माण के लिए करोड़ों हिंदुओं द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा करने में नाकाम रही।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘भगवान राम कोई राजनीतिक औजार या राजनीतिक हस्ती नहीं हैं। वह भारत और विदेशों में लाखों हिंदुओं की आस्था एवं सम्मान के प्रतीक हैं। अगर उन्हें चढ़ाये गये चढ़ावे की चोरी हो गयी है, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? भाजपा को।’’
उन्होंने कहा कि न तो प्रधानमंत्री और न ही ‘डबल-इंजन’ सरकार ने वित्तीय अनियमितताओं की ज़िम्मेदारी ली है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अब तक सामने आई ‘अनियमितताएं’ शायद ‘बड़ी समस्या का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा’ हो सकती हैं । उन्होंने इस कथित ‘घोटाले’ की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की।
कांग्रेस नेता ने सभी दान और चढ़ावे का विस्तृत ऑडिट कराने एवं उसके नतीजों को सार्वजनिक करने की भी मांग की।

