Realty Sector में सतत मांग से बाजार धारणा मजबूत : हीरानंदानी

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नयी दिल्ली: नाइट फ्रैंक और नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के सर्वेक्षण के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर के हितधारकों की धारणा मजबूत बनी हुई है।

यह बाजार धारणा घर खरीदारों की सतत मांग, कम ब्याज दर और निवेशकों के दम पर मजबूत बनी हुई है।

नारेडको के उपाध्यक्ष और हीरानंदानी समूह के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी ने कहा, मौजूदा परि²श्य एक सकारात्मक दृटिकोण देता है लेकिन वैश्विक अस्थिरता और घरेलू प्रतिकूलताओं के मद्देनजर हितधारक भविष्य मेंसतर्क रूख अपनायेंगे।

उन्होंने कहा, बाजार के सामने मुख्य चुनौतियां यह हैं कि कच्चे माल की बढ़ती कीमत से लागत मूल्य में वृद्धि हुई है, कच्चे तेल की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच हैं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में वृद्धि करने का अनुमान है, भू-राजनीतिक परिदृश्य उथल-पुथल से भरा है, स्टाम्प शुल्क की माफी वापस ले ली गयी है और इसके साथ ही अतिरिक्त एक प्रतिशत मेट्रो उपकर लगा है।

नाइट फ्रैं क और नारडेको के सर्वेक्षण रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स पहली तिमाही 2022 के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर में धारणा आशावादी बनी हुई है।

पिछली दो तिमाहियों में भी इस क्षेत्र की धारणायें मजबूत रहीं थीं

सर्वेक्षण के मुताबिक अधिकांश हितधारकों ने पिछले छह माह के दौरान अपने क्षेत्र में सकारात्मक विकास अनुभव किया है।

इस क्षेत्र में भविष्य की धारणा भी मजबूत बनी हुई है। सभी प्रकार की परिसंपत्तियों में मांग बने रहने के अनुमान और आर्थिक परिदृश्य से भविष्य की धारणा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कोरोना संबंधी प्रतिबंधों के हटाने से भी धारणा को मजबूती मिली है।

कोरोना की तीसरी लहर से अच्छी तरह निकलने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था पर इन दिनों यूरोप में जारी युद्ध की अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इन सबके बीच रियल एस्टेट सेक्टर की विकास गति बेरोकटोक रही, विशेष रूप से आवासीय श्रेणी में।

कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर के बाद रियल एस्टेट के कमर्शियल क्षेत्र में तेजी देखी गयी। पिछली दो तिमाहियों में भी इस क्षेत्र की धारणायें मजबूत रहीं थीं।

सर्वेक्षण के दौरान भारत के आर्थिक परिदृश्य के बारे में पूछे जाने पर 85 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अगले छह महीनों में समग्र आर्थिक गति में सुधार की उम्मीद की।

ऋण उपलब्धता परिदृश्य के संदर्भ में, 66 प्रतिशत प्रतिभागियों को उम्मीद है कि अगले छह महीनों में धन की उपलब्धता में वृद्धि होगी जबकि 29 प्रतिशत ने इस अवधि के दौरान समान उपलब्धता रहने की बात की।

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