
नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आबकारी नीति मामले में आरोपी 21 अन्य लोगों से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें निचली अदालत द्वारा ईडी के खिलाफ की गई ‘‘अनुचित’’ टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया गया है।
मामले को 19 मार्च को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सीबीआई की याचिका पर सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया और 16 मार्च को मामले में अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि वह ट्रायल कोर्ट से कहेगी कि मौजूदा याचिका का निपटारा होने तक मनी लॉन्डिंग मामले में कार्यवाही को टाल दे, जिसकी जांच ED ने की है।
केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने यह इशारा भी दिया कि वह CBI अधिकारियों पर ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई ‘पक्षपातपूर्ण टिप्पणियों के अमल पर रोक लगाएगा। एसजी ने कोर्ट से यह अनुरोध भी किया कि वह कोई एक तारीख तय कर CBI की मौजूदा याचिका पर सुनवाई करे और फैसला लें। उन्होंने कहा कि शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को बरी करने का ट्रायल कोर्ट का आदेश गलत था और स्पेशल जज ने आपराधिक कानून को ही पलट कर रख दिया। उन्होंने आरोप लगाते हुए दावा किया कि आबकारी (शराब) नीति मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का एक साफ केस था।
एसजी ने दलील दी कि यह इस देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और इसलिए यह राष्ट्रीय शर्म की बात है। वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई है। उन्होंने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मुकदमा चलाए बिना ही केजरीवाल, सिसोदिया और दूसरों के पक्ष में आरोपमुक्त करने का आदेश दिया। दावा किया कि एजेंसी ने एक बदली हुई शराब नीति के लिए साजिश और रिश्वत दिखाने के लिए बहुत सावधानी से सबूत जमा किए थे, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि केजरीवाल, सिसोदिया और दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए काफी सबूत हैं और सीबीआई के केस को अप्रूवर (आरोपी से सरकारी गवाह बना व्यक्ति) और गवाहों ने समर्थन किया था।
