जलियांवाला बाग़ के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के विरुद्ध अमृतसर में प्रदर्शन, धारा 144 लागू

अमृतसर: केंद्र सरकार द्वारा ऐतिहासिक स्थल जलियांवाला बाग़ के जीर्णोद्धार के बाद पंजाब में विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगने लगे हैं कि केंद्र सरकार ने जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के नाम पर विरासत से छेड़छाड़ की है।

आज अमृतसर में विभिन्न राजनीतिक, कृषि और सामाजिक संगठनों और जलियांवाला बाग के शहीदों के परिजनों ने जलियांवाला बाग के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और आरोप लगाया कि यह ऐतिहासिक स्थल के साथ छेड़छाड़ है।

दिलचस्प बात ये भी है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी एक ट्वीट करके इसकी निंदा की थी, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार के इस प्रयास की सराहना की थी।

अमृतसर पुलिस ने एक स्थान पर पांच या अधिक व्यक्तियों की सभा पर प्रतिबंध लगाने और 6 नवंबर तक स्मारक के आसपास के क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन करने पर धारा 144 लागू कर दी है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्हें बाग में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था, इसलिए भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बीच, देश भगत यादगर सोसाइटी के प्रतिनिधियों, किसान सांझा मोर्चा और शहीदों के परिवारों सहित प्रदर्शनकारियों के पास बाग से पहले धरना देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।

भाकपा के जिला सचिव अमरजीत सिंह असल ने कहा कि भारी पुलिस व्यवस्था से पता चलता है कि हमारे सिस्टम में जनरल रेजिनाल्ड डायर और जनरल ओ डायर की अलोकतांत्रिक दृष्टि अभी भी कायम है।

“एक सदी पहले, उसी स्थान पर ब्रिटिश शासन ने सार्वजनिक सभा पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब, वर्तमान सरकार उसी की नकल कर रही है। हम सिर्फ अधिकारियों को बताना चाहते थे कि जब तक बाग में ऐतिहासिक विरासत बहाल नहीं हो जाती, हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

जलियांवाला बाग फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष सुनील कपूर, जिन्होंने 1919 के नरसंहार में अपने परदादा लाला वासु मल को खो दिया था, ने कहा कि बाग एक स्मारक की तुलना में एक “पिकनिक” और “सेल्फी” स्थान अधिक प्रतीत होता है।

उन्होंने मांग की कि मूल संकरी गली की दीवारों पर लगे भित्ति चित्र, जहां से जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ गुजरे और बाग में निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के एक समूह पर गोलियां चलाईं, को हटा दिया जाए।

वे यह भी चाहते थे कि अलग निकास बिंदु को बंद कर दिया जाए क्योंकि यह इतिहास की अवहेलना करता है जो केवल एक प्रवेश-निकास बिंदु के बारे में बोलता है।

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