सिविल कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिवक्ता की कार नहीं छोड़ी गई, हाई कोर्ट में उठा मामला

Vinita Choubey
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रांची : रांची में एक मामूली सड़क दुर्घटना से जुड़ा मामला अब अदालतों तक पहुंच गया है। अधिवक्ता मनोज टंडन की जब्त कार को रांची सिविल कोर्ट के आदेश के बावजूद डोरंडा थाना पुलिस द्वारा नहीं छोड़े जाने पर विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे को लेकर एडवोकेट एसोसिएशन ने झारखंड हाई कोर्ट में मेंशन किया।

एडवोकेट एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

बताया गया कि सिविल कोर्ट ने कार छोड़ने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद भी वाहन थाना में ही खड़ा रहा। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होना गंभीर विषय है। मामले को हाई कोर्ट के समक्ष रखा गया, जहां इस पर सुनवाई की तिथि तय की गई।

पुलिस ने दाखिल की क्रिमिनल रिवीजन

सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि रांची सिविल कोर्ट के आदेश के खिलाफ क्रिमिनल रिवीजन दायर की गई है। इसी कारण कार रिलीज करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इस पर अदालत ने कहा कि मामले की विधिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी और अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी।

हाई कोर्ट के निर्देश

इससे पहले हाई कोर्ट ने मनोज टंडन की याचिका पर सुनवाई करते हुए डोरंडा थाना में दर्ज दोनों एफआईआर की आगे की जांच और कार्रवाई पर रोक लगाई थी। साथ ही याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई न करने का निर्देश दिया गया है। एसएसपी रांची को पूरे मामले पर नजर रखने और याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि कार को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।

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