
प. बंगाल: टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। हालांकि उन्होंने टीएमसी शासन पर निशाना साधते हुए दावा किया कि वर्षों से जनता और विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हुए अत्याचारों का आक्रोश अब सामने आ रहा है। उन्होंने हालिया चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि जनता की नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
उन्होंने आगे कहा कि बीते 15 वर्षों से जनता जो भुगत रही थी, एक-एक व्यक्ति को सताया गया है. टीएमसी राज में कोई कानून व्यवस्था नहीं थी. घर के सामने से सड़क बंद कर दी जाती थी. ऐसा करने का अधिकार किसने दिया था. उन्होंने कहा कि टीएमसी का एक छोटा नेता तीन-चार गाड़ियों से घूमता था. कोई ट्रैफिक पुलिस नहीं होती थी. हर टीएमसी नेता के घर में पुलिसकर्मी होते थे, ऐसा क्यों होता था?
दिलीप घोष ने आगे कहा कि अब जनता का रोष सामने आ रहा है. इन लोगों से जनता कितनी नाराज थी, फाल्टा चुनाव में साफ देखा जा सकता है. टीएमसी चुनाव में चौथे नंबर पर रही. इस परिणाम को ही देखकर समझ जाना चाहिए. हीरो बनने क्यों चले गए. दिलीप घोष ने कहा कि हम लोगों की भी बहुत धुनाई की गई थी. आज भी मेरे शरीर पर दाग है. कभी किसी को दिखाता नहीं. चुनाव प्रचार के दौरान जेपी नड्डा के साथ गाड़ी में मैं था, टीएमसी के लोगों की ओर से गाड़ियों पर ईंट-पत्थर मारे गए और 10 गाड़ियां तोड़ दी गई थीं.

