
- 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने तय किया था यहां नहीं रखना है मुख्यालय
- डोरंडा में कभी अंग्रेजों का पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज और स्कूल था जिसे बाद में हजारीबाग में ट्रांसफर किया गया
- इसका ब्यौरा 1917 की रांची डिस्ट्रिक्ट गजेटियर्स में दर्ज है जिसे एलएसएस ओ मैली ने लिखा है
दयानंद राय
रांची : राजधानी रांची में स्थित डोरंडा का अंग्रेजी राज में एक अलग ही रुतबा था। यह कभी मिलिट्री कैंटोनमेंट हुआ करता था। और तो और यह रामगढ़ बटालियन का हेडक्वार्टर भी था जिसे अंग्रेजों ने 1778 में चतरा में गठित किया था।
1835 में साउथ वेस्ट फ्रंटियर एजेंसी के गठन के बाद अंग्रेजों ने रामगढ़ बटालियन का हेडक्वार्टर डोरंडा को बनाया। अंग्रेजों ने डोरंडा को रामगढ़ बटालियन के हेडक्वार्टर के रूप में इसलिए चुना क्योंकि यह किशुनपुर (रांची का पुराना नाम) के सिविल हेड क्वार्टर के नजदीक था।
1857 के विद्रोह में डोरंडा में स्थापित रामगढ़ बटालियन के सैनिकों की थी भूमिका

सन 1857 की क्रांति भारत में स्थापित हो चुके अंग्रेजी राज के लिए बहुत बड़ा झटका था। इस क्रांति ने अंग्रेजी राज की चूलें हिला दी थी, इस क्रांति के बाद ब्रिटेन ने इस्ट इंडिया कंपनी से भारत में अंग्रेजी राज की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। इस क्रांति में डोरंडा में स्थापित रामगढ़ बटालियन के सैनिकों की भी भूमिका थी। दरअसल क्रांति के दौरान रामगढ़ बटालियन के सैनिकों ने हजारीबाग में पदस्थापित 8 वीं नैटिव इंफ्रैंट्री के सैनिकों के साथ मिलकर रांची और डोरंडा की सरकारी तथा निजी संपत्तियों को बहुत नुकसान पहुंचाया था।
1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने तय किया कि डोरंडा में रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय रहना उनके हित में नहीं है इसलिए बाद में रामगढ़ बटालियन का मुख्यालय यहां से हटा दिया गया। यही नहीं डोरंडा में जो पुलिस कॉलेज और पुलिस ट्रेनिंग स्कूल था उसे भी हजारीबाग में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा डोरंडा में एक यूरोपियन मिलिट्री सीमेट्री भी थी जो अब भी बटन तालाब के पास में स्थित है।

